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Cce

CCE -  सतत एवं व्यापक मूल्यांकन स्कूल पर आधारित एक प्रणाली है जो बालकों के सर्वांगीण विकास पर अध्ययन करती है  सततता - मूल्यांकन सतत रूप से चलता है जो की निरंतरता को प्रदर्शित करती है, मूल्यांकन की सततता से अभिप्राय अभिवृद्धि तथा विकास की सतत प्रक्रिया को संपूर्ण सत्र में निर्धारित करने से होता है इसमें शैक्षिक क्षेत्र शामिल होता है शैक्षिक क्षेत्र - अधिगम, पाठ्यक्रम,शिक्षण, पाठ्यचर्या  व्यापकता -  शैक्षिक क्रियाओं के साथ-साथ  सह- शैक्षिक क्रियाओं को भी मूल्यांकन के दायरे में लेना उसेेे व्यापकता प्रदान करता है, इसमें सभी पहलुओं पर अध्ययन किया जाता है शैक्षिक एवं सह- शैक्षिक दोनों क्षेत्रों का अध्ययन किया जाता है सह- शैक्षिक क्षेत्र - खेल,संगीत, नृत्य, जीवन कौशल ■  राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 में मूल्यांकन को सतत और व्यापक बनाने पर बल दिया गया   ■ ncf-2005 के निर्देशक तत्वों में परीक्षा को कक्षा की गतिविधियों से जोड़ने पर बल दिया गया  ◆ RTE 2009 की धारा 29(2) में CCE को लागू करने के निर्देश दिए गए ■ भारत में 2009 में CBSE/NCERT व...

हिंदी भाषा शिक्षण विधि श्रुतलेखन विधि वाचन विधि सैनिक विधि

 13 श्रुतिलेखन विधि - भाषा शिक्षण में जब एक शिक्षक सभी बालकों को शुद्ध शब्द लेखन सिखाने का प्रयास करता है तो इसके लिए वह पाठ के किसी हिस्से से 20 कठिन शब्दों का चुनाव करता है तथा स्वयं उन शब्दों को शुद्ध रूप में उच्चारण करता है एंव बालक सुनने के आधार पर शुद्ध रूप में लिखने का प्रयास करते हैं उसके बाद शिक्षक स्वयं प्रत्येक बालक की उत्तर पुस्तिका की जांच करता है और गलत पाए गए शब्दों के गोला लगाते हुए उन्हें खुद शुद्ध रूप से लिखता है और फिर बालक को 10-10 बार शुद्ध लिखने के लिए प्रेरित करता है ऐसा करने से बालक में शुद्ध शब्द लेखन का विकास होता है  गुण   ● मनोवैज्ञानिक विधि है  ● भाषा शुद्धता का विकास होता है ● बालक में समन्वय एवं लेखन कौशल में वृद्धि होती है   दोष - ● समय अधिक लगता है ● योग्य शिक्षकों का अभाव पाया जाता है 14 व्याकरण अनुवाद विधि   - यह विधि अन्य भाषा सिखाते समय एक शिक्षक के द्वारा उपयोग में ली जाती है  ◆ इसमें सबसे पहले  शिक्षक अन्य भाषा की विषय वस्तु को बालक की मातृभाषा में अनुवादित करता है और अनुवाद करते समय अन्य भाषा के व्याकरण का ...

मूल्यांकन की कसौटियां

मूल्यांकन की तकनीकी कसौटियां 1 वैधता -  किसी परीक्षण का निर्माण जिस उद्देश्य को ध्यान में रखकर किया गया हो अगर वह परीक्षण उस उद्देश्य की पूर्ति करने में सहायक है या उस उद्देश्य की पूर्ति करता हो तो परीक्षण का यह गुण वैधता का गुण कहलाता है 2 विश्वसनीयता  - विश्वसनीयता का अर्थ परीक्षण के सही होने से है, किसी परीक्षण को बार-बार अंकन करने के उपरांत भी उसके अंक भार में परिवर्तन न होना ही विश्वसनीयता कहलाती है   Note - विश्वसनीयता को चार बिंदु प्रभावित करते हैं  1 स्मृति 2 प्रायोगिक कार्य  3 अभिरुचि  4 ध्यान केंद्रित करने की क्षमता 3 वस्तुनिष्ठता  - किसी परीक्षण को अलग-अलग प्रशिक्षकों द्वारा बार-बार अंकन करने के उपरांत भी उसके अंक भार में कोई परिवर्तन नहीं होता है तो परीक्षण का यह गुण वस्तुनिष्ठता कहलाता है परीक्षण में वस्तुनिष्ठता 2 पदों पर निर्भर करती है 1 अंक प्रदान करना  2 पदों की व्याख्या करना  Note - वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में विश्वसनीयता व वैधता का गुण सर्वाधिक पाया जाता है  4 व्यापकता  - किसी भी परीक्षण का निर्माण बालकों के शैक्षणिक...

हिंदी शिक्षण विधियां आगमन निगमन विधि

  10  आगमन विधि जब एक शिक्षक उदाहरण के सहयोग से किसी नियम तक पहुंचता है तो वह सकारात्मक  सूत्रों का प्रयोग लेता है,  इसे ही आगमन उपागम कहते हैं ◆ इस उपागम में ज्ञात से अज्ञात की ओर, विशिष्ट से सामान्य की ओर, स्थूल से सूक्ष्म की ओर, विश्लेषण से संश्लेषण की ओर सूत्रों का उपयोग किया जाता है आगमन विधि के चरण  ◆ उदाहरण प्रस्तुतीकरण ◆ निरीक्षण/ तुलना  ◆ सामान्यीकरण ● सत्यापन   आगमन विधि के गुण ● यह मनोवैज्ञानिक विधि है ● इस विधि से प्राप्त ज्ञान स्थाई होता है ● यह विधि तर्क व चिंतन का विकास करती है ● समस्या समाधान के गुणों का विकास करती है ● प्रारंभिक कक्षाओं के बालकों के लिए विशेष रूचिकर विधि है ● इस विधि में शिक्षक व छात्र दोनों क्रियाशील रहते हैं ● यह विधि बालकों में खोजी प्रवृत्ति का विकास करती है आगमन विधि के दोष ● समय अधिक खर्च होता है ● पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं हो पाता है ● प्रतिभाशाली बालकों में उस कक्षा के बालकों में नीरसता पैदा करती है ● अध्यापक को उदाहरण देने की कला में प्रवीण होना अत्यावश्यक है ● किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए काफी उदाहरण देने...

मूल्यांकन पार्ट 2

  मूल्यांकन के प्रकार  - मनोवैज्ञानिकों ने मूल्यांकन के दो प्रकार बताए हैं  1 रचनात्मक मूल्यांकन (FA) - शिक्षण कार्य के दौरान छात्रों की कमजोरियों का पता लगाने का अथार्थ शिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए FA का आयोजन किया जाता है  ◆ इसके अंक रिपोर्ट कार्ड में शामिल नहीं किये जातेे ◆  यह सीखने के लिए आकलन है 2 योगात्मक मूल्यांकन (SA) -  एक निश्चित अवधि के पश्चात इस बात का पता लगाना  कि शैक्षिक उद्देश्य कहां तक प्राप्त हुए हैं SA मूल्यांकन कहलाता है  ◆ इसके ग्रेड्स तथा प्राप्तांक रिपोर्ट कार्ड में शामिल किए जाते हैं  ◆ यह सीखने का आकलन है मूल्यांकन की प्रमुख विधियां 1 ज्ञानात्मक पक्ष -   ■ मौखिक ■ लिखित ■ प्रायोगिक लिखित -  (A) वस्तुनिष्ठ (B) निबंधात्मक वस्तुनिष्ठ -  (अ) प्रत्यास्मरण  - सामान्य, रिक्त स्थान (ब) प्रत्याभिज्ञान - सुमेल, बेमेल, हां / ना , बहुविकल्पी 2 भावात्मक पक्ष-   ◆ CAT ◆ TAT ◆ IBT ◆ SAT ◆ WAT ◆ IQ   3 क्रियात्मक पक्ष- ● जीवन इतिहास विधि  ● समाजमिति विधि  ● प्रश्नावली विधि ● साक्षात्कार विध...

सीखने के प्रतिफल

  सीखने के प्रतिफल -  किसी शिक्षण प्रक्रिया में भाग लेने के दौरान छात्र द्वारा प्रदर्शित विशिष्ट ज्ञान कौशल जिन का मापन किया जा सके तथा वह उसे विशिष्ट कार्य करने में सहायता प्रदान करें तो इसे सीखने का प्रतिफल कहते हैं  अथवा जो कुछ भी बच्चे ने सीखा है उसको जांचने अथवा उस परिणाम को देखने के मापदंड को अधिगम प्रतिफल के रूप में देखा जा सकता है ◆ किसी शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में संपन्न होने के पश्चात बालक के व्यवहार प्रदर्शित होने वाले विशिष्ट ज्ञान कौशल क्षमता का आकलन करने की प्रक्रिया ही सीखने का प्रतिफल है  ■ सर्वप्रथम 1990 के दशक में ऑस्ट्रेलिया एवं दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में आउटकम बेसिक शिक्षा प्रणालियों का प्रारंभ हुआ इस शिक्षा प्रणाली को अमेरिका द्वारा सन् 1994 में अपनाया गया ◆ सीखने के प्रतिफल का निर्माण NCERT द्वारा किया गया ■ 2017 में NCERT ने एक सर्वे के माध्यम से यह निष्कर्ष प्राप्त किया की शिक्षण अधिगम प्रक्रिया का आखिर प्रतिफल क्या निकला है यह भी सुनिश्चित रूप से पता होना ही चाहिए  ◆ इस को ध्यान में रखते हुए कक्षा 1 से ही सीखने के प्रतिफल का ब्यौरा तैय...

मूल्यांकन part 1

मूल्यांकन एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है जिसका निर्माण मूल्य + अंकन के मिलने से हुआ  ■ अतः किसी विषय वस्तु को उनके गुणों के आधार पर मूल्य प्रदान करने की प्रक्रिया मूल्यांकन कहलाती है  ■ मूल्यांकन अंग्रेजी के Evaluation शब्द का हिन्दी रूपांतरण है इसका शाब्दिक अर्थ - निष्कर्ष निकालना या निर्णय देने से है अतः बालकों के द्वारा किए गए कार्यों के आधार पर उनकी योग्यताओं एवं गुणों के संदर्भ में अंतिम निर्णय देने की प्रक्रिया मूल्यांकन कहलाती है ◆ मापन एक मात्रात्मक प्रक्रिया है जबकि मूल्यांकन मात्रात्मक और गुणात्मक प्रक्रिया है  ◆ मूल्यांकन बालकों की सर्वांगीण विकास करने वाली प्रक्रिया है क्योंकि मूल्यांकन का संबंध बालकों के ज्ञानात्मक, भावात्मक , क्रियात्मक तीनों पक्षों से होता है  ◆ मूल्यांकन प्रक्रिया में बालकों के साथ शिक्षक व शिक्षण विधियां हैं उनकी सहायक सामग्री का भी मूल्यांकन होता है NCERT के द्वारा प्रकाशित पुस्तक concept of evalaution के अनुसार - मूल्यांकन एक सतत प्रक्रिया है जिससे पता चलता है कि शैक्षिक उद्देश्य कहां तक प्राप्त हुए हैं तथा अधिगम अनुभव कितने प्र...

हिंदी भाषा शिक्षण विधियां भाषा संसर्ग विधि

  7 भाषा संसर्ग विधि  - भाषा शिक्षण में जब एक बालक को बिना वर्णमाला का ज्ञान करवाएं शब्दों का ज्ञान दिया जाता है तो कम से कम समय में बालक को पुस्तक पढ़ना सिखा दिया जाता है तो यह भाषा संसर्ग विधि होती है  ■ सर्वप्रथम 1992 ईस्वी में लोक जुंबिश परियोजना के माध्यम से भारत देश में भाषा संसर्ग विधि का प्रचलन शुरू हुआ और वर्तमान में एक बालक को कम से कम समय में पढ़ना लिखना सिखा दिया जाता है  ■ लार्ड मैकाले भाषा संसर्ग विधि के समर्थक माने जाते हैं भाषा संसर्ग विधि के गुण ● प्राथमिक कक्षाओं में व्याकरण पढ़ाने की यही प्रणाली लाभदायक है  ● व्याकरण के नियमों का ज्ञान कराए बिना भाषा के शुद्ध रूप का अनुकरण करने का अवसर प्रदान कर छात्रों को भाषा के शुद्ध रूप का प्रयोग करना सिखाया जाता है  ● इसके द्वारा प्राथमिक कक्षाओं में रचना तथा अभ्यास द्वारा भाषा का शुद्ध प्रयोग किया जाता है  ● इस विधि में व्याकरण का सैद्धांतिक ज्ञान न दिया जाकर व्यवहारिक ज्ञान पर बल दिया जाता है ●  बालक में शब्द ज्ञान शीघ्रता से पैदा होता है बालक कम समय में पुस्तक पढ़ने लग जाता है भाषा संसर्...

क्रियात्मक अनुसंधान

  क्रियात्मक अनुसंधान   ● विद्यालय में उत्पन्न होने वाली दिन प्रतिदिन की शैक्षणिक समस्याओं का समाधान करने की प्रक्रिया क्रियात्मक अनुसंधान  कहलाती है  ◆ विद्यालय के दिन प्रतिदिन की समस्याओं का अध्ययन कर उनका समाधान किया जाता है ताकि विद्यालय में सुधार हो सके  ◆ क्रियात्मक अनुसंधान प्रक्रिया का संचालन शिक्षकों प्रबंधकों व संस्था प्रधानों द्वारा किया जाता है  ● क्रियात्मक अनुसंधान का क्षेत्र बड़ा व्यापक है वर्तमान युग में इस कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं बचा है जहां क्रियात्मक अनुसंधान न किए गए हैं चाहे विद्यालय हो, लड़ाई का मैदान हो, खेल अथवा पहलवानों का अखाड़ा हो ◆ क्रियात्मक अनुसंधान का सर्वप्रथम प्रयोग कोलियर ने किया ◆ 1946 में सामाजिक संबंधों में सुधार करने के लिए सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में क्रियात्मक अनुसंधान का प्रयोग लेविन द्वारा किया गया ◆ शिक्षा के क्षेत्र में क्रियात्मक अनुसंधान का सर्वप्रथम प्रयोग 1953 में स्टीफन एम कोरे द्वारा किया गया ◆ अतः स्टीफन एम कोरे को क्रियात्मक अनुसंधान का जनक माना जाता है ◆ भारत में सर्वप्रथम क्रियात्मक अनुसंधान शब्द का प...

हिंदी शिक्षण विधियां व्याख्यान विधि निरीक्षण विधि

 4 व्याख्यान विधि  - ◆ इस विधि में केंद्र बिंदु शिक्षक होता है ◆ यह प्राचीन विधि है ◆ अध्यापक पूर्व में तैयार गई सामग्री को जो कि त्यों कक्षा में प्रस्तुत करता है  ◆इस विधि में अध्यापकों दो कार्य करना पड़ते हैं 1  विषय वस्तु का चयन कर तैयारी करना  2 कक्षा में भाषण के माध्यम से विषय वस्तु को प्रस्तुत करना  ◆ इस विधि में अध्यापक में अच्छे वक्ता व अच्छे श्रोता के गुण होने चाहिए   व्याख्यान विधि के गुण    ● इस विधि द्वारा ज्ञान तीव्र गति से दिया जा सकता है  ● अध्यापक के लिए सुविधाजनक विधि है   ● अधिक परिश्रम नहीं करना पड़ता   ● इस विधि से विद्यार्थियों में स्वर्ण कौशल का विकास होता है   ● भारतीय परिवेश के लिए यह विधि अनुकूल है  व्याख्यान विधि के दोष  ★ इस विधि का प्रयोग केवल उच्च कक्षाओं में ही किया जा सकता है ★  यह विधि बाल केंद्रित नहीं है  ★ बालक एक निष्क्रिय श्रोता के रूप में हो जाता है  ★ रटने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देती है  ★ सभी अध्यापक इस विधि का अनुसरण नहीं कर सकते 5 निरीक्...

हिंदी शिक्षण विधियां- अनुकरण विधि, प्रत्यक्ष विधि, प्रायोजना विधि

1 अनुकरण विधि - जब एक बालक पहली बार भाषा सीखने की शुरुआत करता है तो वह शिक्षक के कार्यो का अनुकरण करते हुए सीखता है अनुकरण तीन प्रकार का होता है 1 लेखन अनुकरण - जब एक शिक्षक बालक को लिखना सिखाता है तो उसके लिए वह अपने कार्यों का अनुकरण बालक से करवाता है अनुकरण करते हुए बालक लिखना सीखता है  ■ लेखन अनुकरण भी दो प्रकार का होता है  (A) रूपरेखा लेखन अनुकरण - जब एक शिक्षक बालक के सामने किसी वर्ण शब्द या अंक की रूपरेखा बनाकर दे देता है और वह बालक उस रूपरेखा के आधार पर वास्तविक वर्ण या शब्द की रचना कर लेता है  (B) स्वतंत्र लेखन अनुकरण - जब एक शिक्षक के सामने किसी वर्णमाला गिनती शब्दों को एक साथ लिख देता है और कक्षा कक्ष में बैठे हुए बालक स्वतंत्र रूप से उसे देखते हुए लिखने का प्रयास करता है 2 उच्चारण अनुकरण - जब बालक को लिखना आ जाता है तो उसकी अगली आवश्यकता लिखित विषय वस्तु को बोलने या उच्चारित करने की होती है इसके लिए शिक्षक पहले स्वयं उच्चारण करता है और फिर बालक उसके साथ साथ उच्चारण करने लगता है पूर्व प्राथमिक कक्षाओं के लिए प्रत्येक विद्यालय में ऐसी अनिवार्यता होती है कि अं...

आरटीई 2009 पार्ट 2- 7 अध्याय 38 धारा

आरटीई 2009  अध्याय 1 -   ◆ प्रारंभिक परिचय  ◆ धारा 1 व 2 धारा 1  नाम - RTE -2009  विस्तार संपूर्ण - भारत में  लागू -  1 अप्रैल 2010 धारा 2 -  ◆ उप धाराओं का उल्लेख  ◆ बालक से आशय-  6 से 14 वर्ष / 6 -18 वर्ष  ◆ प्रारंभिक शिक्षा 1 से 8 तक  ◆ त्रिभाषा फार्मूला लागू ◆ विद्यालय के प्रकार व प्रति बालक फीस का निर्धारण अध्याय 2 ■ निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान  ■ धारा 3 से 5 तक धारा 3  -  6 से 14 वर्ष के बालकों को निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार लागू धारा 4 -  ड्रॉप आउट बालको या विद्यालय से न जुड़े बालकों को आयु के अनुसार कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा धारा 5 -  टीसी मांगने पर टीसी प्रदान करना अध्याय 3   ■ समुचित सरकार, स्थानीय प्राधिकारी, माता पिता के कर्तव्य  ■ धारा 6 से 11 तक धारा 6 -  विद्यालय की स्थापना के संबंध में  कक्षा 1 से 5 तक - 1 किलोमीटर पर  कक्षा 6 से 8 तक - 3 किलोमीटर पर धारा 7 -  वित्तीय अनुपात  केंद्र : राज्य   55 : 45  65 : 35...

आरटीई 2009 पार्ट 1

 शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 ◆ 1937 में वर्धा सम्मेलन में महात्मा गांधी व जाकिर हुसैन के द्वारा शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया गया ◆ 1937 में ही महात्मा गांधी द्वारा बुनियादी शिक्षा की नींव रखी गई ◆ सर्वप्रथम 1910 में गोपाल कृष्ण गोखले द्वारा समावेशी शिक्षा का विचार दिया गया ◆ 1948 में डॉ राधाकृष्णन द्वारा निशुल्क व अनिवार्य शिक्षा का विचार प्रस्तुत किया गया ★ राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1968, 1986, 1988, 1992 में निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा की कल्पना की गई किंतु व्यवहारिक रूप से उन्हें लागू नहीं किया जा सका ◆ 1976 में संविधान के 42 वें संविधान संशोधन में शिक्षा को समवर्ती सूची में शामिल किया गया ◆ 1993 में प्रोफसर यशपाल शर्मा ने शिक्षा के क्षेत्र में तनाव एंव बोझ मुक्त शिक्षा समिति का गठन किया ◆ Ncf-2005 में पाठ्य चर्चा पर विशेष चर्चा की गई ◆ संविधान के 86 वें संविधान संशोधन द्वारा 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के सभी बालकों को शिक्षा का मौलिक अधिकार प्रदान किया गया (अनुच्छेद 21( a)) ■ 20 जुलाई 2009 को आरटीई राज्यसभा में पारित ■ 4 अगस्त 2009 को लोकसभा में पारित ■ 26 अगस्त 2009 को राष्ट्रपति...

बीएस ब्लूम के शैक्षिक उद्देश्यों का वर्गीकरण

बी एस ब्लूम ने अपनी पुस्तक शैक्षिक उद्देश्यों का वर्गीकरण के अंतर्गत शैक्षिक उद्देश्यों को तीन भागों में बांटा-  1 संज्ञानात्मक पक्ष -  इस पक्ष के उद्देश्यों का वर्गीकरण बी एस ब्लूम द्वारा 1956 में किया गया ◆  इसका संबंध बौद्धिक क्षमताओं से होता है ● ब्लूम ने इसके अंतर्गत 6 उद्देश्य निर्धारित किए (A) ज्ञान  - सूचनाओं, तथ्यों तथा संप्रत्यो की जानकारी अर्जित करना, पहचानना, आंकड़ों का प्रत्यास्मरण करना (B) अवबोध  -  सीखे गए ज्ञान पर समझ विकसित करना, तुलना करना, अंतर करना, संबंध स्थापित करना, वर्गीकरण करना (C) अनुप्रयोग - सीखे गए व समझे गए ज्ञान का व्यावहारिक परिस्थितियों में प्रयोग करना (D) विश्लेषण -  सीखे गए ज्ञान के विभिन्न खंडों को पृथक कर अलग अलग कर उनके खंड बनाना तथा उनका समाधान करना (E) संश्लेषण  - विश्लेषण के पश्चात अलग-अलग खंडों को पुनः संगठित करना उनके आधार पर उनके आधार पर नवीन निष्कर्ष का सृजन करना (F) मूल्यांकन - सीखी गई विषय वस्तु की जांच करना कि वह किस सीमा तक आत्मसात हुई उतार कितना अपेक्षित विकसित व्यवहार गत परिवर्तन हुआ 2 भा...

गद्य शिक्षण की विधियां

 गद्य शिक्षण की विधियां महत्व   ● शब्द भंडार में वृद्धि  ● सृजनात्मक क्षमता का विकास ● व्याकरण का ज्ञान  ● लिपि का ज्ञान  ● उच्चारण का ज्ञान  ● गद्य की विभिन्न विधाओं का ज्ञान ●  मानसिक बौद्धिक व तार्किक क्षमता का विकास 1 अर्थ कथन विधि  -  ◆ इस विधि में अध्यापक गद्य का मौखिक पठन करता है पठन के साथ-साथ कठिन शब्दों के अर्थ बताए जाते हैं  ◆ अध्यापक अपनी ओर से सब कुछ बताता है विद्यार्थी निष्क्रिय श्रोता के रूप में रहते हैं  ◆ इस विधि में बच्चों को सोचने समझने का अवसर नहीं मिलता है ◆ बच्चों में न तो अर्थ ग्रहण क्षमता का विकास होता है और ना ही विचारों को अभिव्यक्त करने की क्षमता का विकास होता है इस कारण यह एक नीरस विधि है 2 समीक्षा विधि - ◆ इस विधि में गद्य के तत्वों का विश्लेषण कर उसके गुण दोष परखे जाते हैं  ◆ इस विधि में अध्यापक निष्क्रिय व छात्र सक्रिय रहता है यह स्वतंत्र विधि नहीं है बल्कि पूरक विधि है  ◆ उच्च कक्षा में उपयोगी इस विधि में अध्यापक प्रश्नोत्तर व्याख्या एवं कथन के माध्यम से नाटक के तत्वो की समीक्षा करता है 3 वि...

Ncf-2005

  Ncf-2005 (राष्ट्रीय पाठ्यचर्या कार्यक्रम 2005) ◆ सर्वप्रथम ncf-2005 का विचार NPE -1986 के तहत किया गया  ◆ NPE-1986 में इस बात पर बल दिया गया कि पाठ्यचर्या को राष्ट्रीय चरित्र के निर्माण की पृष्ठभूमि तैयार करनी चाहिए ◆ NPE-1986 के तहत पाठ्यचर्या राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली को विकसित करने का साधन है  ◆ POA - 1992 ( प्रोग्राम ऑफ एक्शन ) में प्रसंगिकता, गुणवत्ता, लचीलापन के तत्वों पर बल दिया और NPE के प्रावधानों का क्रियान्वयन किया  ■ 1993 में यशपाल शर्मा समिति ने कहा की बालकों को तनावमुक्त व बिना बोझ की शिक्षा प्रदान की जाए  ■ स्कूली शिक्षा के विकास हेतु पाठ्यचर्या का निर्माण MHRD द्वारा किया गया  ◆ NCF-2005 विद्यालय शिक्षा का सबसे नवीनतम दस्तावेज माना जाता है  ◆ NCF-2005 का निर्माण का प्रमुख उद्देश्य बालकों के सामाजिक गुणों का विकास करने तथा उन्हें सुयोग्य नागरिक बनाने से है इसी कारण ncf-2005 में समाजिक अध्ययन जैसा नवीन विषय जोड़ा गया ■ NCF-1975 (first) ■ NCF-1988 (second) ■ NCFSE - 2000 (third) ■ NCF-2005  ★ NCF-2005 का निर्माण रविंद्र नाथ टैगोर के...

हिंदी शिक्षण विधियां- पद्य शिक्षण की विधियां

  शिक्षण विधि  - किसी शिक्षक के द्वारा कक्षा कक्ष मैं अपने विषय वस्तु को पढ़ाने या प्रस्तुत करने का जो तरीका काम में लिया जाता है उसे शिक्षण विधि का जाता है  ◆ यह एक शिक्षक एवं कक्षा कक्ष को ही प्रभावित करता है जिसके कारण शिक्षण विधि का क्षेत्र सीमित माना जाता है  शिक्षण प्रणाली  - एक विद्यालय में सुबह से लेकर शाम तक जो गतिविधियां संचालित होती हैं उनके तरीके को ही शिक्षण प्रणाली कहा जाता है ◆  शिक्षण प्रणाली संपूर्ण विद्यालय को प्रभावित करती है जिसके कारण इसका क्षेत्र व्यापक माना जाता है भाषा शिक्षण के रूप 1 पद्य  2  गद्य   3 व्याकरण   4 रचना   पद्य शिक्षण के उद्देश्य   ◆ रसानुभूति ◆ कल्पना शक्ति का विकास ◆ कविता के प्रति रुचि व प्रेम उत्पन्न करना ◆ कविता सृजन की शक्ति उत्पन्न करना ◆ छंद अलंकार रस आदि का ज्ञान देना ◆ छात्रों को अपने देश की संस्कृति धर्म दर्शन आदि की जानकारी देना पद्य शिक्षण की विधियां   गीत विधि-  अध्यापक बालकों को छोटे-छोटे बाल गीतों के माध्यम से कविता का शिक्षण कराता है  ◆ प्राथमिक स्तर के...

शिक्षण अधिगम प्रक्रिया पार्ट 2

  शिक्षण द्विमुखी प्रक्रिया -  एडम्स महोदय ने शिक्षा को त्रिमुखी प्रक्रिया माना है जिसके दो ध्रुव निम्न है  1  शिक्षक   2  शिक्षार्थी शिक्षण त्रिमुखी प्रक्रिया- जॉन डीवी के अनुसार शिक्षण त्रिमुखी प्रक्रिया है शिक्षक व शिक्षार्थी के मध्य अंतः क्रिया होती है जो पाठ्यक्रम पर आधारित होती है अतः शिक्षण प्रक्रिया के तीन महत्वपूर्ण अंग निम्न है- 1 शिक्षक 2 शिक्षार्थी 3 पाठ्यक्रम शिक्षक  - शिक्षण प्रदान करने की महत्वपूर्ण धुरी  ■ फ्रोबेल ने अपनी शिक्षा प्रणाली में शिक्षक को बालोद्यान का कुशल माली कहा है  ■ रविंद्र नाथ टैगोर के अनुसार - एक अच्छा शिक्षक तभी अच्छा अध्यापन करवा सकता है जब वह स्वयं अध्ययनरत रहता हो, एक जलता हुआ दीपक की दूसरे दीपक को प्रज्वलित कर सकता है  कॉलसैनिक के अनुसार - शिक्षा मनोविज्ञान शिक्षक विशेष को यह निर्णय करने में सहायता दे सकता है कि वह विशिष्ट परिस्थितियों में अपनी विशिष्ट समस्याओं का समाधान किस प्रकार करें शिक्षक की कुशलता   विषय का पूर्ण ज्ञान हो  बालकों के प्रति प्रेम व सहानुभूति पूर्ण व्यवहार कर...

भाषा शिक्षण के उपागम

भाषा शिक्षण के उपागम- किसी भी भाषा शिक्षण उपागम को समझना एक सैद्धांतिक दृष्टिकोण है की भाषा क्या है और इसे कैसे सीखा जा सकता है  ◆ कुछ सिखाने का तरीका जो सीखने वालों की मदद के लिए कक्षा की गतिविधियों या  तकनीक का उपयोग किया जाता है उपागम की श्रेणी में आता है ◆  उपागम शिक्षण विधियों को जन्म देता है  ◆ शिक्षण विधियां उपागम पर आधारित होती है  ■ वर्तमान समय में उपागम के अंतर्गत सिद्धांत और आधार सम्मिलित किए जाते हैं जिनका अनुसरण करते हुए पाठ्यक्रम का आयोजन किया जाता है और इन्हीं के आधार पर शिक्षण विधियों का चयन किया जाता है  ◆ किसी भी पाठ को पढ़ाने के लिए एक पाठ योजना बनाई जाती है  ■ पाठ योजना में बच्चों को पाठ समझाने के दृष्टिकोण हेतु अनेक शिक्षण विधियों का प्रयोग करते हैं ■  इस प्रक्रिया में पाठ योजना एक उपागम है और जिन तरीकों से उस पाठ योजना में शिक्षण कार्य करवाते हैं वह  शिक्षण विधियां है  पाठ योजना उपागम-  पाठ योजना का जन्म गेस्टाल्ट मनोविज्ञान से हुआ  ◆ योजना से आशय किसी कार्य को करने से पहले सोचना विचारना और आवश्यकता और क...

शिक्षण अधिगम प्रक्रिया पार्ट 1

  शिक्षण अधिगम प्रक्रिया  ◆ शिक्षण का अर्थ बालक को शिक्षक के द्वारा विभिन्न विषयों का अधिगम करवाना  ■ शिक्षण व अधिगम में गहरा संबंध है संकुचित अर्थ - निश्चित समय में निश्चित स्थान पर निश्चित शिक्षण विधियों द्वारा बालक को पूर्व नियोजित ढंग से शिक्षण प्रदान करना  ◆ इस प्रक्रिया में शिक्षक का स्थान महत्वपूर्ण है शिक्षण के व्यापक अर्थ में -  औपचारिक तथा अनौपचारिक दोनों साधनों का प्रयोग सम्मिलित है ■ शिक्षा शब्द अंग्रेजी भाषा के एजुकेशन शब्द का हिंदी रूपांतरण है ◆  एजुकेशन शब्द लेटिन भाषा के एजुकेटम शब्द से निकला है यह दो शब्दों से मिलकर बना है ई और ड्यूको ■ ई का अर्थ है अंदर से तथा ड्यूको का अर्थ है आगे बढ़ना ★ इस प्रकार शाब्दिक रूप से एजुकेटम का अर्थ है अंदर से बाहर की ओर बढ़ना अथार्थ शिक्षा व्यक्ति की आंतरिक शक्तियों को विकसित करने की प्रक्रिया है रॉबर्ट गेने के अनुसार -  शिक्षण का तात्पर्य अधिगम की दशा को व्यवस्थित करना जोकि अधिगम अधिगमकर्ता की बह्ययता से संबंधित है बर्ट के अनुसार - शिक्षण अधिगम हेतु प्रेरणा, पथ प्रदर्शक व प्रोत्साहन है डंक...