बीएस ब्लूम के शैक्षिक उद्देश्यों का वर्गीकरण

बी एस ब्लूम ने अपनी पुस्तक शैक्षिक उद्देश्यों का वर्गीकरण के अंतर्गत शैक्षिक उद्देश्यों को तीन भागों में बांटा- 

1 संज्ञानात्मक पक्ष - इस पक्ष के उद्देश्यों का वर्गीकरण बी एस ब्लूम द्वारा 1956 में किया गया

◆  इसका संबंध बौद्धिक क्षमताओं से होता है

● ब्लूम ने इसके अंतर्गत 6 उद्देश्य निर्धारित किए

(A) ज्ञान - सूचनाओं, तथ्यों तथा संप्रत्यो की जानकारी अर्जित करना, पहचानना, आंकड़ों का प्रत्यास्मरण करना

(B) अवबोध -  सीखे गए ज्ञान पर समझ विकसित करना, तुलना करना, अंतर करना, संबंध स्थापित करना, वर्गीकरण करना

(C) अनुप्रयोग - सीखे गए व समझे गए ज्ञान का व्यावहारिक परिस्थितियों में प्रयोग करना

(D) विश्लेषण -  सीखे गए ज्ञान के विभिन्न खंडों को पृथक कर अलग अलग कर उनके खंड बनाना तथा उनका समाधान करना

(E) संश्लेषण - विश्लेषण के पश्चात अलग-अलग खंडों को पुनः संगठित करना उनके आधार पर उनके आधार पर नवीन निष्कर्ष का सृजन करना

(F) मूल्यांकन - सीखी गई विषय वस्तु की जांच करना कि वह किस सीमा तक आत्मसात हुई उतार कितना अपेक्षित विकसित व्यवहार गत परिवर्तन हुआ

2 भावात्मक पक्ष - इस पक्ष के उद्देश्यों का वर्गीकरण करथवाल व मसीहा ने 1994 में किया

◆  इस पक्ष का संबंध भावनाओं, रुचियों, दृष्टिकोण, संवेगों से होता है 

★ इसके अंतर्गत 5 उद्देश्य निर्धारित किए गए हैं

(A) आग्रहण करना - बालकों को प्रेरित करना ताकि उनमें विषय गत मूल्यों को प्राप्त करने की इच्छा जागृत हो सके

(B) अनुक्रिया - दिए गए निर्देश के अनुसार कार्य करना जैसे - उत्तर देना , आज्ञा पालन करना

(C)अनुमूल्यन  - किन्हीं विशिष्ट मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता दिखाना

(D) संगठन - इसके अंतर्गत बालक अपने पूर्व अनुभवों को एक दूसरे से जोड़कर किसी निष्कर्ष पर पहुंचता है

 जैसे - सामान्यीकरण करना या तथा पुष्टि करना

(E) चरित्रीकरण -  इसके अंतर्गत अपनाए गए मूल्य व्यक्ति के व्यवहार का स्थायी हिस्सा बन जाते हैं 

जैसे निश्चय करना, किसी कार्य के संबंध में निरंतर एवं नियमित विचार करना

3 क्रियात्मक पक्ष - सिंपसन ने 1969 में क्रियात्मक पक्ष का वर्गीकरण किया 

◆ इस पक्ष का संबंध व्यक्ति के शारीरिक कौशलों से होता है जिसमें अभ्यास की आवश्यकता होती है 

★इसके अंतर्गत 5 उद्देश्य निर्धारित किए गए

(A) उद्दीपन - व्यक्ति किसी भी कार्य को होते देख स्वयं कार्य करना प्रारंभ करता है

(B) कार्य करना/परिचालन - इसमें व्यक्ति दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए उनके अनुसार कार्य करता है

(C) परिशुद्धता - इसमें व्यक्ति अपने अभ्यास द्वारा अपनी क्रिया की त्रुटियों को कम करने का प्रयास करता है

(D) समन्वय - इसके अंतर्गत व्यक्ति एक साथ कई कार्य करता है और उनमें समन्वय स्थापित करता है

(E) आदत निर्माण - यह क्रियात्मक पक्ष का सबसे उच्च स्तर है, इसमें व्यक्ति का कार्य करना यंत्रवत हो जाता है

■ उक्त तीनों पक्ष संज्ञानात्मक, भावात्मक एवं क्रियात्मक को अलग नहीं किया जा सकता, यह तीनों एक दूसरे पर निर्भर हैं

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