मूल्यांकन पार्ट 2

 मूल्यांकन के प्रकार - मनोवैज्ञानिकों ने मूल्यांकन के दो प्रकार बताए हैं 

1 रचनात्मक मूल्यांकन (FA) - शिक्षण कार्य के दौरान छात्रों की कमजोरियों का पता लगाने का अथार्थ शिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए FA का आयोजन किया जाता है

 ◆ इसके अंक रिपोर्ट कार्ड में शामिल नहीं किये जातेे

◆  यह सीखने के लिए आकलन है

2 योगात्मक मूल्यांकन (SA) - एक निश्चित अवधि के पश्चात इस बात का पता लगाना  कि शैक्षिक उद्देश्य कहां तक प्राप्त हुए हैं SA मूल्यांकन कहलाता है 

◆ इसके ग्रेड्स तथा प्राप्तांक रिपोर्ट कार्ड में शामिल किए जाते हैं 

◆ यह सीखने का आकलन है

मूल्यांकन की प्रमुख विधियां

1 ज्ञानात्मक पक्ष -

  ■ मौखिक ■ लिखित ■ प्रायोगिक

लिखित

(A) वस्तुनिष्ठ (B) निबंधात्मक

वस्तुनिष्ठ -

 (अ) प्रत्यास्मरण  - सामान्य, रिक्त स्थान

(ब) प्रत्याभिज्ञान - सुमेल, बेमेल, हां / ना , बहुविकल्पी

2 भावात्मक पक्ष-

  ◆ CAT ◆ TAT ◆ IBT ◆ SAT ◆ WAT ◆ IQ

 3 क्रियात्मक पक्ष-

● जीवन इतिहास विधि  ● समाजमिति विधि 

● प्रश्नावली विधि ● साक्षात्कार विधि


वस्तुनिष्ठ प्रश्न -

◆ सर्वप्रथम विचार-  होराशमेन ने दिया

◆ शिक्षा के क्षेत्र में प्रयोग J M राइस ने किया

गुण - 

● एक प्रश्न का एक ही उत्तर 

● वैधता व विश्वसनीयता का गुण सर्वाधिक 

● प्रश्नों की जांच आसान 

● पक्षपात संभव नहीं

● कम समय में अधिक बालकों का मूल्यांकन संभव 

दोष

● निर्माण करना जटिल कार्य

● नकल की संभावना 

● लेखन कार्य का विकास संभव नहीं 

● मंदबुद्धि बालकों के लिए अनुपयोगी 

● अत्यंत खर्चीली

● अनुमान से उत्तर देने की संभावना

निबंधात्मक प्रश्न - सर्वप्रथम 1702 में लंदन के कैंब्रिज विश्वविद्यालय में पहली बार प्रयोग में किया गया 

गुण

◆ निर्माण आसान 

◆ व्यवहारिक गुणों का विकास

◆  लेखन कौशल का विकास

◆ अभिव्यक्ति की क्षमता का विकास

◆ व्याकरण संबंधी अशुद्धियों का निराकरण 

दोष 

◆ इनकी जांच कठिन कार्य

◆  पक्षपात संभव

◆ विषय विशेषज्ञों की आवश्यकता 

◆ वैधता व विश्वसनीयता का अभाव

◆ संपूर्ण पाठ्यक्रम का मूल्यांकन संभव नहीं

मूल्यांकन की कसौटीयां

(अ)- व्याहारिक कसौटियां- 

1 उद्देश्यता - किसी परीक्षण का निर्माण करने से पहले उसके उद्देश्यय का निर्धारण कर लेना चाहिए प्रत्येक परीक्षण उद्देश्य आधारित होना चाहिए 

2 व्यापकता - परीक्षण के निर्माण में विषय वस्तु के सभी पक्षों का समावेश व्यापकता में आताा है

3 मितव्यता - परीक्षण के निर्माण में कम से कम न धन का व्यय करना

4 सर्वमान्यता - किसी परीक्षण का निर्माण इस प्रकार से किया जाए कि किसी भी व्यक्ति द्वारा उस परीक्षण का उपयोग किसी भी परिस्थिति में किया जा सके

5 न्याययुक्तता - परीक्षण के द्वारा जिस पर भी निष्कर्ष निकाला जाए वह निष्कर्ष उसकी वास्तविकता व समक्षता को प्रकट करने वाला होना चाहिए, न्याययुक्तता के अंतर्गत किसी भी पक्ष पर पक्षपात की भावना निहित नहींं होती

6  प्रतिनिधित्वता -  किसी परीक्षण का निर्माण जिन बिंदुओं को ध्यान में रखकर किया जाए उन बिंदुओं को संपूर्ण विषय वस्तु का प्रतिनिधित्व करने वाला होना चाहिए

7 समक्षता  - जिस परीक्षण का निर्माण किया जाए वह व्यवहारिक को तथा सभी के समक्ष हो

8 गतिशीलता - परीक्षण के कथनो हिंदी एंव उन्हें  पूर्ण करने के समय के मध्य गतिशीलता का भाव होना चाहिए 

● परीक्षण की गति का निर्धारण इस प्रकार से किया जाए कि निश्चित समय में परीक्षण को पूर्ण किया जा सके

9 भाषा - किसी भी परीक्षण का निर्माण करते समय यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि परीक्षण की भाषा सरल व सहज होनी चाहिए 

10 व्यवहारिकता - किसी भी परीक्षण का निर्माण करते समय परीक्षण में व्यवहारिकता के गुणों को समावेशित किया जाना अति महत्वपूर्ण कार्य है

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