हिंदी शिक्षण विधियां व्याख्यान विधि निरीक्षण विधि
4 व्याख्यान विधि -
◆ इस विधि में केंद्र बिंदु शिक्षक होता है
◆ यह प्राचीन विधि है
◆ अध्यापक पूर्व में तैयार गई सामग्री को जो कि त्यों कक्षा में प्रस्तुत करता है
◆इस विधि में अध्यापकों दो कार्य करना पड़ते हैं
1 विषय वस्तु का चयन कर तैयारी करना
2 कक्षा में भाषण के माध्यम से विषय वस्तु को प्रस्तुत करना
◆ इस विधि में अध्यापक में अच्छे वक्ता व अच्छे श्रोता के गुण होने चाहिए
व्याख्यान विधि के गुण
● इस विधि द्वारा ज्ञान तीव्र गति से दिया जा सकता है
● अध्यापक के लिए सुविधाजनक विधि है
● अधिक परिश्रम नहीं करना पड़ता
● इस विधि से विद्यार्थियों में स्वर्ण कौशल का विकास होता है
● भारतीय परिवेश के लिए यह विधि अनुकूल है
व्याख्यान विधि के दोष
★ इस विधि का प्रयोग केवल उच्च कक्षाओं में ही किया जा सकता है
★ यह विधि बाल केंद्रित नहीं है
★ बालक एक निष्क्रिय श्रोता के रूप में हो जाता है
★ रटने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देती है
★ सभी अध्यापक इस विधि का अनुसरण नहीं कर सकते
5 निरीक्षण विधि-
■ हिंदी शिक्षण की सबसे महत्वपूर्ण विधि है
■ यह विधि देखकर सीखना नामक सिद्धांत पर आधारित है
■ इस विधि में बालक किसी वस्तु स्थानीय व्यक्ति को देखकर ही उसके बारे में ज्ञान प्राप्त करता है
निरीक्षण विधि के लाभ
★ इस विधि द्वारा प्राप्त ज्ञान स्थाई होता है
★ यह विधि क्रियाशीलता के सिद्धांत का पालन करती है
★ बालक वास्तविक स्थिति से ज्ञान प्राप्त करता है
निरीक्षण विधि के दोष
◆ सीखने में बहुत समय नष्ट होता है
◆ अत्यधिक खर्चीली विधि है
◆ छात्रों को बाहरी स्थान पर अनुशासित रखने में कठिनाई आती है
निरीक्षण विधि की विशेषताएं
● यह मनोवैज्ञानिक विधि है
● छात्रों की ज्ञानेंद्रियों का विकास होता है
● छात्रों के चिंतन शक्ति एवं तर्क शक्ति का विकास होता है
● छात्र के ज्ञान के भंडार में वृद्धि होती है
● बालकों में विषय के प्रति रुचि और जिज्ञासा उत्पन्न होती है
निरीक्षण विधि के संदर्भ में आवश्यक सावधानियां-
★ इस विधि का प्रयोग करते समय परिस्थितियां छात्रों के जीवन से संबंधित होनी चाहिए
★ छात्रों की निरीक्षण की जाने वाली वस्तु स्थान व्यक्ति संबंधित हर जिज्ञासा को शांत किया जाना चाहिए
★ निरीक्षण के बाद निष्कर्ष सावधानी से निकाले जाएं
★ निरीक्षण की जाने वाली वस्तु और परिस्थितियों का निरीक्षण करना वे छात्रों के मानसिक स्तर के अनुकूल होनी चाहिए
★ निरीक्षण के समय शिक्षक छात्रों का उचित ढंग से मार्गदर्शन करें
★ निरीक्षण को केवल मनोरंजन ने माना जाए
6 व्यतिरेकी विधि - व्यतिरेकी शब्द का शाब्दिक अर्थ तुलना करना
भाषा शिक्षण में जब एक शिक्षक दो भाषाओं को एक साथ स्पष्ट करने का प्रयास करता है तो वह उन दोनों भाषाओं को तुलनात्मक रूप से सिखाते समय उनकी समानता व असमानता को स्पष्ट करने का प्रयास करता है
इस विधि में समुचित भाषा के सहारे व्याख्या द्वारा दोनों भाषाओं की ध्वनि,रूप, शब्द,वाक्य व्यवस्था के अंतर को स्पष्ट किया जाता है
व्यतिरेकी विधि के लाभ
◆ द्वितीय भाषा सीखने के लिए प्रयुक्त होती है
◆ दो भाषाओं के तुलनात्मक अध्ययन के लिए इसका प्रयोग किया जाता है
◆ मातृभाषा और सीखे जाने वाली द्वितीय भाषा दोनों का वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत किया जाता है
◆ उच्च कक्षाओं के लिए उपयोगी है
व्यतिरेकी विधि के दोष
◆ प्राथमिक कक्षाओं के लिए उपयोगी नहीं है
◆ प्रत्येक बालक इस विधि का लाभ नहीं उठा सकता
◆ समय अधिक लगता है
★भोले नाथ तिवारी ने इस विधि को द्वितीय भाषा शिक्षण की सर्वोत्तम विधि कहा है
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