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विविध अधिगमकर्ता अपराधी बालक

अपराधी बालक-  जब कोई व्यवहार सामाजिक नियमों व आदर्शों के विरुद्ध किसी बालक द्वारा किया जाता है तो उसे बाल अपराध करते हैं स्किनर के अनुसार  - बाल अपराध की परिभाषा किसी कानून के उल्लंघन के रूप में की जा सकती है जो किसी वयस्क द्वारा करने पर अपराध माना जाए वैलेंटाइन के अनुसार  - मोटे तौर पर बाल अपराध किसी कानून के भंग होने का उल्लेख करता है न्यूमेयर के अनुसार -  बाल अपराध का अर्थ समाज विरोधी व्यवहार से है जो व्यक्तिगत व सामाजिक विघटन उत्पन्न करता है हिली के अनुसार  - परिवार के सामाजिक नियमों से विचलित होने वाले बालकों को बाल अपराधी कहते हैं गुडविन के अनुसार-  बाल अपराधी वह बालक होता है जो बार-बार उस कार्य को करने पर जोर देता है, जो दंडनीय माना जाता है बाल अपराध के प्रकार-  ● चोरी करना ● झूठ बोलना ● हत्या करन ● धूम्रपान करना ● सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना ● बिना टिकट यात्रा करना ● अनुचित भाषा का प्रयोग करना ● हस्तमैथुन करना ● आत्महत्या के लिए उकसाना ● मादक पदार्थों का सेवन करना ■ एलिस नामक मनोवैज्ञानिक ने लिखा की अपराधी बालक बालिकाओं का अनुपात 80:2...

विविध अधिगमकर्ता समस्यात्मक बालक

  समस्यात्मक बालक - वे बालक जो सामान्य बालकों के अनुपात में अपने व्यवहार में अत्यधिक  असमानताएं प्रकट करते हैं, समस्यात्मक बालक कहलाते हैं वैलेंटाइन के अनुसार  - समस्यात्मक बालक वे होते हैं जिनका व्यक्तित्व किसी भी बात में गंभीर नहीं होता  ■ ये सामाजिक आदर्शों के विपरीत कार्य करना पसंद करते हैं  ■ बर्ट ने समस्यात्मक बालक को के दो प्रकार बताएं  1 आक्रामक बालक  - जो बालक अपने संवेगों को को तीव्र गति से प्रकट करते हैं, आक्रामक बालक कहलाते हैं  ◆ इनमें धैर्य की कमी होती है तथा ये बालक कभी भी परिस्थिति के अनुसार व्यवहार नहीं करते  ◆ आक्रामक बालकों को चोरी करना, झूठ बोलना , अनुशासनहीनता करना , पलायन करना अच्छा लगता है  ★ इन बालकों में मिथोमेनिया व सिज़्रोफेनिया विकार पाया जाता है  2 दमित प्रवृति के बालक - वे बालक जो किसी अज्ञात आशंका/ डर के कारण अपने विचारों को प्रकट न करते हो, दमित बालक कहलाते हैं ◆ इनमें विचारों की अभिव्यक्ति का गुण नहीं होता  ◆इनमें ईर्ष्या संवेग सर्वाधिक प्रबल होता है  दमित प्रवृत्ति के बालक   ...

अधिगम के कौशल - पठन कौशल

पढ़ना/पठन कौशल - विषय वस्तु को अर्थ ग्रहण करते हुए मनोयोग पूर्वक पढ़ना पठन कौशल कहलाता है ◆ यह सुनना व बोलना कौशल की तुलना में कठिन होता है ◆ विकास क्रम की स्थिति में इसका तीसरा स्थान है लेकिन मारिया मांटेसरी इसे अंतिम कौशल मानती है ■ इस कौशल द्वारा प्राप्त ज्ञान ज्यादा समय तक स्थायी रहता है अतः इसे सर्वाधिक महत्वपूर्ण व स्थायी कौशल कहा जाता है ★ पठन की प्रक्रिया को चार भागों में विभाजित किया गया है  1 प्रत्याभिज्ञान   2 अर्थ ग्रहण   3 अनुप्रयोग   4 मूल्यांकन और प्रतिक्रिया पठन कौशल में आने वाली कठिनाइयां  ★ वर्ण पहचान में कठिनाई  ★ बालक को वर्णों के उच्चारण स्थान का ज्ञान न होना  ★ जिहवा दोष या दिव्यांगता ★ बालकों को होने वाली शंका  ★ कठिन शब्दों के पठन में परेशानी ★ पूर्वाग्रह से ग्रसित  ★ प्रयत्नलाघव (शब्द को छोटा करना) ★ क्षेत्रियता का प्रभाव  ★ विद्यार्थी को व्याकरण के ज्ञान का अभाव  ★ नाक से पठन (गुनगुनाते हुए) पठन कौशल के विकास हेतु प्रयास-  ● इस कौशल के विकास हेतु बालक को वर्णों का व उनके उच्चारण स्थानों...

विविध अधिगमकर्ता - पिछड़े बालक

  पिछड़े बालक-  वह बालक जो सामान्य बालकों के अनुपात में निम्न योग्यता का प्रदर्शन करता है पिछड़ा वाला कहलाता है   बर्ट के अनुसार  - शारीरिक सामाजिक संवेगात्मक एवं मानसिक दृष्टि से सामान्य बालकों के अनुपात में निम्न योग्यताओं का प्रदर्शन करने वाले बालक पिछड़े बालक कहलाते हैं  ■ सामान्य पिछड़ा बालक  - वह बालक जो अपने जीवन के अधिकांश क्षेत्रों में निम्न योग्यता का प्रदर्शन करता है वह सामान्य पिछड़ा बालक कहलाता है  ● इन बालकों की सीखने की गति धीमी होती है ● इनकी बुद्धि लब्धि  80 से 90 के मध्य मानी जाती है  बर्ट के अनुसार - जो बालक अपनी आयु स्तर के अनुसार की कक्षा से एक सीढ़ी नीचे की कक्षा का कार्य करने में भी असमर्थ होते हैं, पिछड़े बालक कहलाते हैं सामान्य पिछड़े बालकों की विशेषता ● मानसिक श्रम करने पर थकान  ● आत्मविश्वास में कमी ● अंतर्मुखी प्रवृत्ति ● निर्णय करने में कठिनाई ● अनुकरण द्वारा सीखना ● जिज्ञासा की कमी ● तर्क वितर्क करने में असक्षम सामान्य पिछड़े बालकों की शिक्षा ◆ कम मानसिक श्रम प्रदान करना  ◆ व्यक्तिगत निर्देशन व परामर्श...

अधिगम के कौशल - सुनना व बोलना कौशल

1 सुनना कौशल -  यह प्राथमिक कौशल है क्योंकि इसका विकास सबसे पहले होता है  ■ किसी विषय वस्तु को अर्थ ग्रहण करते हुए मनोयोग पूर्वक सुनना श्रवण कौशल कहलाता है  ★ श्रवण कौशल का अर्थ है बालक में ऐसी क्षमता का विकास करना जिससे वह किसी कथन या बात को सुनकर, चिंतन - मनन कर उस कथन या बात पर उचित निर्णय ले सके ★ यह अधिगम के अवयवों में प्रथम स्थान रखता है  ■ एक सर्वे में पाया गया कि जितने नहीं बोलने वाले/ गूंगे व्यक्ति थे उनमें से 95% वे थे जो बहरे थे अथार्थ सुनने की क्षमता नहीं होने से वे बोलना नहीं जानते थे  ◆सुनना कौशल के विकास के अंतर्गत निम्न विशेषताएं अति आवश्यक है  1 अंतरबोध   जो आवाज या ध्वनि  सुनाई दे रही है उसमें जो अंतर है उसको समझना  जैसे- क, ख, ग की ध्वनि का अंतर 2 धारण शक्ति जो सुनते समय समझ में आ रहा है उसको अपने व्यवहार में सीख लेना, स्मरण रखना या धारण कर लेना की शक्ति इसी प्रकार से विषय वस्तुु को सुनते हुए ध्यान पूर्वक सुनना 3 अवबोध शक्ति- बोले गए शब्द की ध्वनि के आधार पर उसकी रचना का बोध होना जैसे- क+अ+म+अ+ल+अ = कमल श्रवण कौशल विकसित ...

अधिगम के कौशल

अधिगम के कौशल - बालक में सीखने की योग्यता का विकास वातावरण व उसके अभ्यास पर निर्भर करता है  सीखने की योग्यता बालक में व्यवहार परिवर्तन निर्धारित करती है  ★ बालक में सीखने हेतु 4 अवयव माने जाते हैं    1 सुनकर 2  बोलकर 3 पढ़कर  4 लिखकर  ■ सीखने के अवयवों में दक्षता लाना ही अधिगम के कौशल है  ■ कौशलों की संख्या 4 है -      सुनना ---  बोलना --- पढ़ना --- लिखना  ■ एक बालक में इनका विकास क्रम-      सुनना - बोलना -पढ़ना -लिखना  मनोवैज्ञानिक क्रम=  सुनना -बोलना- पढ़ना- लिखना  फ्रोबेल महोदय के अनुसार  =  सुनना - बोलना - पढ़ना - लिखना साहचर्य विधि के प्रवर्तक महोदया मारिया मोंटेसरी के अनुसार =    सुनना - बोलना - लिखना - पढ़ना (अंतिम दो का क्रम बदल दिया)  और कहा कि बालक को लिखने से पहले पढ़ना सिखाना मुद्रण पर भोकने के समान है ★ बोलना कौशल, सुनना कौशल पर निर्भर करता है ★ लिखना कौशल, पढ़ना कौशल पर निर्भर करता है  ★ सुनना व बोलना कौशल का संबंध मौखिक रूप से होता है  ★ पढ़ना ...

विविध अधिगमकर्ता- प्रतिभाशाली बालक

  विशिष्ट बालक-  मनोवैज्ञानिक विचारधारा के अनुसार प्रत्येक बालक विशिष्ट होता है अपार जो बालक औसत दर्जे के बालकों से भिन्न होता है विशिष्ट बालक कहलाता है प्रतिभाशाली बालक - वह बालक जो सामान्य बालकों की तुलना में श्रेष्ठ व्यवहार का प्रदर्शन करता है प्रतिभाशाली बालक कहलाता है  टर्मन के अनुसार - जिन बालकों की बुद्धि लब्धि 140 से अधिक होती है प्रतिभाशाली बालक कहलाते हैं  स्किनर के अनुसार - प्रतिभाशाली शब्द कक्षा के उन 1 प्रतिशत बालकों के लिए प्रयुक्त किया जाता है जो सबसे अधिक बुद्धिमान होते हैं  कॉल सैनिक के अनुसार - प्रतिभाशाली बालक प्रत्येक क्षेत्र में श्रेष्ठ होते हैं तथा समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं  बर्ट के अनुसार - प्रतिभाशाली बालक जन्मजात होते हैं इन्हें बनाया नहीं जा सकता  क्रो एंड क्रो के अनुसार-  शारीरिक संरचना की दृष्टि से प्रतिभाशाली बालक अन्य बालकों से भिन्न होते हैं जेम्स ड्रेवर के अनुसार - सामान्य रूप से किसी क्षेत्र में उच्च बौद्धिक क्षमता रखने वाला बालक प्रतिभाशाली बालक होता है प्रतिभाशाली बालकों की विशेषताएं - ◆ मानस...

भाषा दक्षता का विकास

भाषा दक्षता का विकास- भाषा वह शक्ति है जिसके माध्यम से मानव स्वयं को दूसरों के समक्ष के प्रस्तुत करता है  भाषा की प्रमुुख दक्षता निम्न है  सुनना  बोलना  पढ़ना  लिखना  विचारों का बोधन  व्यवहारिक व्याकरण   स्वअधिगम  भाषा प्रयोग  शब्द भंडार पर अधिकार भाषा के बिंब - जब भी कोई वस्तु, व्यक्ति, शब्द, वर्ण आदि हमारे आंखों के सामने आते हैं तो इनके चित्र हमारे मस्तिष्क में बन जाते हैं और स्थायी हो जाते हैं जिससे ही हमारी भाषा आगे बढ़ती है इसलिए इन्हें भाषा बिंब कहते हैं ★  भाषा बिंब मुख्य रूप से चार प्रकार के होते हैं 1दृश्य बिम्ब  -जब भी कोई व्यक्ति वस्तु शब्द हमारी आंखों के सामने होते हैं तो उसी समय उनका चित्र हमारे सामने बन जाता है तो इसे दृश्य बिम्ब कहते हैं  उदाहरण - मेरे सामने से हाथी जा रहा है 2 श्रव्य बिम्ब - जब कोई व्यक्ति वस्तु आदि पहले हमारे द्वारा देखे हुए होते हैं फिर बाद में कभी उनका नाम या आवाज सुनने मात्र से उनका चित्र हमारे मस्तिष्क में बन जाता है तो उसे श्रव्य बिंब कहते हैं उदाहरण - माँ दरवाजा खोलो शायद ...

कुसमायोजन

  कुसमायोजन-  समायोजन की विपरीत प्रक्रिया है जब व्यक्ति की आवश्यकता एवं उन्हें प्रभावित करने वाले कारकों के मध्य संतुलन स्थापित नहीं होता है तो उसे कुसमायोजन कहते हैं ■ कुसमायोजन अंग्रेजी के mal- adjustment शब्द का हिंदी रूपांतरण है जिसका शाब्दिक अर्थ अपनी परिस्थितियों के साथ सामंजस्य स्थापित न होने से है  ■ स्किनर के अनुसार - कुसमायोजन अधिगम निर्योग्यता को प्रकट करने वाली प्रक्रिया है ■  गेट्स के अनुसार-  कुसमायोजन व्यक्ति के अस्थिर व्यक्तित्व को प्रकट करने वाली प्रक्रिया है   कुसमायोजित व्यक्ति की विशेषताएं = ★ मानसिक रूप से अस्वस्थ ★ नकारात्मक सोच ★ बाधाओं को देखकर घबराना ★ आकांक्षा की कमी ★ समस्या समाधान की योग्यता का अभाव ★ संवेगात्मक दृष्टि से अपरिपक्व ★ अपने परिस्थितियों पर नियंत्रण करने में असमर्थ   कुसमायोजित व्यक्ति के लक्षण ◆ संवेगो में उग्रता ◆ शारीरिक दोष ◆ नजरें चुराना ◆ पलायन करना ◆ नशीले पदार्थों का सेवन ◆ अनैतिक कार्य करना कुसमायोजन के कारण 1 व्यक्तिगत कारण ● शरीर का रंग ● भद्दापन ● निम्न रुचि स्तर ● निम्न मानसिकता ● लंबी बी...

भाषा शिक्षण

भाषा  - भाषा शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के भाष धातु से हुई है भाष धातु से अर्थ है प्रकट करना  ★ जिस माध्यम से हम अपने मन के भाव व मस्तिष्क के विचार बोलकर प्रकट करते हैं उसे भाषा कहा जाता है ●  व्यापक अर्थ में भाषा वह साधन है जिसके माध्यम से हम सोचते हैं और अपने विचारों को व्यक्त करते हैं ■ भाषा वह साधन है,जिसमें विचारों का आदान-प्रदान होता है ◆ स्वीट के अनुसार -  ध्वन्यात्मक शब्दों द्वारा विचारों का प्रकटीकरण ही भाषा है ◆ सीताराम चतुर्वेदी के अनुसार- भाषा के आर्विभाव  से यह संसार गूंगो की विराट बस्ती होने से बच गया ◆ सुमित्रानंदन पंत के अनुसार -  भाषा संसार का नादमय स्वरूप है ध्वनिमय संगीत है और हृदय तंत्र की झंकार है जिसके स्वर से अभिव्यक्ति होती है ◆ डॉ भोले नाथ तिवारी के अनुसार-  भाषा उच्चारण अवयवों से उच्चारित यादृच्छिक ध्वनि की व्यवस्था है जिसके द्वारा एक समाज के लोग आपस में भावो ओर विचारों का आदान प्रदान करते हैं ◆ क्रोंचे के अनुसार-   भाषा अभिव्यक्ति की दृष्टि से उच्चरित एवं सीमित ध्वनियों का संगठन है  ◆ बाबूराम सक्सेना के अनुसार -...

समायोजन की अप्रत्यक्ष युक्तियां

समायोजन की अप्रत्यक्ष युक्तियां  1 प्रक्षेपण - अपनी असफलता का दोष किसी और पर लगाकर अपने आप को संतुष्ट कर लेना  उदाहरण-  नाच न जाने आंगन टेढ़ा  2 औचित्यस्थापन -  उद्देश्य की प्राप्ति न होने पर उद्देश्य में ही कमी निकालना  उदाहरण - अंगूर खट्टे हैं            ★ऊंची दुकान फीके पकवान  3 विस्थापन - अपने आक्रोश को उस जगह व्यक्त करना जहां पुनः  आक्रमण की संभावना न हो   उदाहरण - पिता द्वारा पीटे जाने पर घर से बाहर जाकर कुत्ते को पत्थर मारना  ★ शिक्षक द्वारा पिटाई करने पर घर जाकर छोटे भाई को पीटना   4 तादात्त्मीकरण - समायोजन स्थापित करने हेतु  किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति के साथ संबंध स्थापित कर प्रतिष्ठित व्यक्ति जैसा व्यवहार करना  उदाहरण - पुलिस द्वारा रोकने पर किसी राजनेता का नाम लेना  5 प्रतिगमन - वर्तमान की तनावपूर्ण स्थिति से बचने के लिए अपनी पूर्व स्थिति की ओर लौटना प्रतिगमन है   उदाहरण - व्यस्क द्वारा बच्चों की तरह फूट फूट कर रोना  6 प्रतिक्रमण - अपने मूल स्वभाव के विपरी...

समायोजन के बाधक तत्व

  समायोजन के बाधक तत्व 1 संघर्ष / द्वंद - जब व्यक्ति के सम्मुख एक ही समय में दो समान महत्व की वस्तुएं उत्पन्न हो जाए और व्यक्ति को किसी एक का चयन करना पड़े तो उत्पन्न किया संघर्ष कहलाती है (A) उपागम - उपागम द्वंद - जब व्यक्ति के समक्ष दो धनात्मक लक्ष्य हो  उदाहरण-  पटवारी व ग्रामसेवक में से एक का चयन करना (B) परिहार परिहार द्वंद  - जब व्यक्ति के समय समक्ष दो नकारात्मक लक्ष्य हो  उदाहरण आगे कुआं पीछे खाई (C) उपागम - परिहार द्वंद - जब व्यक्ति के सामने एक तरफ एक तरफ परिस्थिति प्रतिकूल हो जबकि दूसरी तरफ अनुकूल परिस्थिति हो 2 तनाव  - समय परिस्थिति के अनुसार आवश्यकता की पूर्ति न होने पर उत्पन्न किया तनाव कहलाती है समय पर नौकरी नहीं मिलना जरूरत के समय पैसों का नया होना 3 दबाव  - सफलता असफलता एवं समाज में प्रतिष्ठा बनाए रखने हेतु उत्पन्न किया दबाव कहलाती है उदाहरण प्रतियोगिता छात्र द्वारा तैयारी करना 4 भग्नाशा - निरंतर प्रयास करने के उपरांत भी जब व्यक्ति को सफलता प्राप्त नहीं होती है तो वह निराश हो जाता है उसी निराशा को भग्नासा या कुंठा कहते हैं क्योंकि भग...

समायोजन

समायोजन-  समायोजन अंग्रेजी के ADJUSTMENT शब्द का हिंदी रूपांतरण है जिसका शाब्दिक अर्थ अपनी परिस्थितियों या वातावरण के साथ संतुलन स्थापित करने से माना जाता है  ■ समय परिस्थिति के अनुसार अपने व्यवहार में परिवर्तन करना अनुकूलन कहलाता है अतः अपनी परिस्थितियों के साथ अनुकूलन करने की प्रक्रिया ही समायोजन है  ■ समायोजन सम + आयोजन दो शब्दों से मिलकर बना है सम का अर्थ अच्छी तरह से तथा आयोजन का अर्थ व्यवस्था करना  अथार्थ समायोजन से तात्पर्य है समय परिस्थिति व आवश्यकता के अनुसार अपने आपको व्यवस्थित करना   विशेष अर्थ में  - अपनी आवश्यकताओं एवं उन्हें प्रभावित करने वाले कारकों के मध्य संतुलन स्थापित करने की प्रक्रिया समायोजन है   स्किनर के अनुसार - समायोजन अधिगम में वृद्धि करने की प्रक्रिया है  बोरिंग व लेंगफील्ड के अनुसार - व्यक्ति के आवश्यकताओ एवं उन्हें प्रभावित करने वाले कारकों के मध्य संतुलन स्थापित करने की प्रक्रिया समायोजन कहलाती है गेट्स के अनुसार  - अपनी आवश्यकता पूर्ति हेतु स्वयं के व्यवहार में परिवर्तन करने की प्रक्रिया समायोजन है कोलमैन...

सूक्ष्म शिक्षण के कौशल 2

सूक्ष्म शिक्षण के कौशल  5 प्रदर्शन कौशल - व्याख्या कौशल की नीरसता व इससे उत्पन्न अरुचि को दूर करने के लिए अध्यापक द्वारा विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष अनुभव कराने हेतु जिन कौशलो को प्रयोग में लाया जाता है वह प्रदर्शन कौशल में गिने जाते हैं ◆ इसमें अध्यापक द्वारा चित्र, मॉडल,प्रतिरूप, चार्ट, सारणी ग्राफ, वास्तविक सामग्री तथा रंगमंच का प्रयोग किया जाता है  ◆मनोविज्ञान का मानना है कि करके सीखा हुआ ज्ञान अधिक स्थाई रहता है क्योंकि इसमें छात्र अधिक सक्रिय रहता है  ◆ जितनी अधिक ज्ञानेंद्रियां सक्रिय रहती है प्राप्त ज्ञान उतना अधिक स्थाई होता है  ◆इसका प्रयोग करते समय यदि छात्र सहभागिता ली जाती है तो पाठ में रुचि बढ़ जाती है ◆ प्रदर्शित सामग्री विषय वस्तु से संबंधित होनी चाहिए ◆ प्रदर्शित सामग्री विद्यार्थियों के स्तर के अनुकूल हो  ◆ प्रदर्शित सामग्री कक्षा कक्ष के वातावरण के अनुकूल होनी चाहिए  ◆अध्यापक को स्वयं भी एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत करना चाहिए ताकि विद्यार्थियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़े  ◆ प्रदर्शन कौशल में जो विषय वस्तु पर सामग्री प्रदर्शित की जानी ह...

सूक्ष्म शिक्षण के प्रमुख कौशल

सूक्ष्म शिक्षण के कौशल  1 प्रस्तावना कौशल  =  ★ इस कौशल का संबंध पाठ के आरंभ के पूर्व से है इसके द्वारा विद्यार्थियों के पूर्व ज्ञान की खोज की जाती है ★ इसमें वे प्रश्न होते हैं जो विद्यार्थियों के पूर्व ज्ञान पर निर्भर करते हैं इसका संबंध कक्षा में पढ़ाने के पूर्व से होता है अथार्थ इसे पाठ योजना का हिस्सा माना जाता है ★ इस कौशल में प्रश्नों के माध्यम से प्रकरण तक पहुंचा जाता है  ★ प्रश्न पूछते समय यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि प्रश्नों में तारतम्यता का गुण हो ★ प्रथम प्रश्न के उत्तर से अगला प्रश्न आरंभ करना चाहिए ★ प्रश्नों का स्तर विद्यार्थियों के पूर्व ज्ञान से अधिक ना हो  ★ प्रश्न स्पष्ट होने चाहिए, प्रश्न संक्षिप्त होने चाहिए  ★ अंतिम प्रश्न समस्यात्मक होना चाहिए ताकि प्रकरण का नाम घोषित किया जा सके  ★इस कौशल का समय अधिकतम 5 से 7 मिनट होता है  ★ इसमें प्रश्नों के अतिरिक्त लघुकथा, चार्ट, प्रतिरूप का भी सहारा लिया जा सकता है  2 प्रश्न सहजता कौशल =  ◆ इस कौशल के अंतर्गत अध्यापक को अभ्यास कराया जाता है कि पूछे जाने वाले प्रश्न भाषा की दृष्...

तर्क

तर्क = किसी भी समस्या के समाधान हेतु किया गया वह चिंतन जिसके द्वारा निश्चित रूप से समाधान हो ही जाता है ऐसे वास्तविक चिंतन को तर्क कहते हैं  ■ चिंतन को क्रमबद्ध करने की प्रक्रिया तर्क है  ■ तर्क को चिंतन का सर्वोच्च स्तर भी कहते हैं  ★ तर्क वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से व्यक्ति किसी वस्तु घटना के संदर्भ में तर्क - वितर्क करते हुए किसी परिणाम तक पहुंचता है  गैरेट के अनुसार - मन में किसी उद्देश्य को रखकर किया गया क्रमबद्ध चिंतन ही तर्क कहलाता है  गेट्स के अनुसार -  तर्क एक निश्चित फलदाई चिंतन की प्रक्रिया है  जेम्स ड्रेवर के अनुसार - तर्क वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से किसी निश्चित निष्कर्ष तक पहुंचने का कार्य किया जाता है  स्किनर के अनुसार  -  तर्क शब्द का प्रयोग कारण व उसके प्रभावों की मानसिक पहचान करने के लिए किया जाता है  तर्क के प्रकार   निगमनात्मक तर्क - पूर्व में ज्ञात नियमों के आधार पर किसी निश्चित निष्कर्ष तक पहुंचने की प्रक्रिया निगमनात्मक तर्क कहलाती है  नोट - निगमनात्मक तर्क मानव व पशु दोनों में होता है...

स्मृति व कल्पना

स्मृति - स्मृति पर सर्वप्रथम क्रमबद्ध अध्ययन जर्मन  मनोवैज्ञानिक ऐविंगहास द्वारा 1885 में किया गया   वुडवर्थ के अनुसार - सीखने के पश्चात उस बात को याद रखना या पुनः प्रस्तुत करना स्मृति कलहाती है   ■ स्मृति के तीन प्रमुख तत्व है   1 कूट संकेतन  2 भंडारण  3 पुनरुद्धार  ■ एटकिंसन ने 1968 में स्मृति का प्रथम मॉडल "अवस्था मॉडल" प्रस्तुत किया  ★ अवस्था मॉडल के अनुसार स्मृति तीन प्रकार की होती है 1 तात्कालिक स्मृति - इसमें व्यक्ति सूचनाओं को एक सेकंड या उससे भी कम समय के लिए याद रख पाता है  2 अल्पकालिक स्मृति -  इसमें स्मृति का स्थाईपन 20 - 30 सेकंड तक होता है ★  विलियम जेम्स ने इसे प्राथमिक समृति का है 3  दीर्घकालीन स्मृति - इसे विलियम जेम्स ने गौण स्मृति कहा है,  इसमें व्यक्ति कम से कम 30 सेकंड तथा अधिक से अधिक कितने भी दिनों तक याद रख सकता है  मानचित्र निरूपण  - मानचित्र निरूपण एक ऐसा चित्र या नक्शा होता है जो विभिन्न अवधारणाओं के बीच संबंध को दर्शाता है यह एक आलेखीय उपकरण होता है जो किसी विषय के अलग-अलग पह...

भाषा शिक्षण शिक्षण विधियां

भाषा शिक्षण  कौशल   = अध्यापक में उपस्थित ज्ञान को विद्यार्थियों के अपेक्षित स्तर तक ले जाने की प्रक्रिया कौशल कहलाती है जो कि प्रशिक्षण द्वारा विकसित होती है  ■ अध्यापक को इन कौशलों का प्रशिक्षण दिया जाना सूक्ष्म शिक्षण में गिना जाता है   सूक्ष्म शिक्षण =  शिक्षण की ऐसी प्रविधि जो नियंत्रित स्थितियों में पूर्ण होती है सूक्ष्म शिक्षण कहलाती है   ■ सर्वप्रथम अमेरिकी शिक्षा शास्त्री W ऐलन महोदय ने 1954 से 1960 के मध्य इस दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया, उन्होंने माना कि परंपरागत शिक्षण की नीरस विधियों को बदलकर नवाचार की आवश्यकता है जिसके लिए अध्यापकों को प्रशिक्षण की बेहद आवश्यकता होती है ■  इस विचार को गति प्रदान करने हेतु स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के 2 विद्यार्थी कीथ व एचीसन ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया, उन्होंने 1961 में यह योजना कक्षा कक्ष में लागू कर दी  ■ इसके आशा अनुरूप परिणाम आने के पश्चात 1963 में इसे व्यापक स्तर पर लागू किया गया  ■भारत में NCERT (1961 में स्थापना) ने उच्च अध्ययन शिक्षा केंद्र, बड़ौदा के सहयोग से 1975 में लागू किया ■...

समस्या समाधान

  समस्या समाधान -  समस्या समाधान उपागम हंट द्वारा दिया गया, यह उच्च स्तरीय उपागम माना जाता है इसमें सृजनात्मक चिंतन निहित रहता है  ★ जब व्यक्ति के सामने समस्या उपस्थित होती है तो समस्या चिंतन को जन्म देती है तथा चिंतन के द्वारा व्यक्ति समस्या का समाधान खोजता है  ★ समस्या समाधान एक वैज्ञानिक विधि है  ■ बेरॉन के अनुसार - समस्या समाधान एक संज्ञानात्मक प्रक्रिया है इसमें विभिन्न अनुक्रियाओं को करने या उनमें से चुनने का प्रयास सम्मिलित रहता है ताकि वांछित लक्ष्य की प्राप्ति हो सके  समस्या समाधान के चरण  1 समस्या की पहचान करना  2 रूपरेखा तैयार करना  3 आंकड़ों का संकलन करना  4 उपकल्पनाओं का निर्माण करना  5 आंकड़ों का विश्लेषण करना  6 निष्कर्ष निकालना  समस्या समाधान की विधियां 1 यादृच्छिक अन्वेषण विधि - इस विधि में व्यक्ति समाधान के लिए प्रयत्न व त्रुटियों का सहारा लेता है  2 स्वतः शोध अन्वेषण विधि - इस विधि में व्यक्ति समस्या समाधान के लिए उन्हीं विकल्पों का चयन करता है जो उसे संगत प्रतीत होते हैं  मेटलिन के अनुस...

अभिप्रेरणा का वर्गीकरण व सिद्धांत

अभिप्रेरणा का वर्गीकरण= थॉमसन के अनुसार     1 प्राकृतिक अभिप्रेरणा-     ● संवेदना    ● ईगो    ● सामाजिक प्रेरणा    ● सवेंगात्मक प्रेरणा 2 कृत्रिम अभिप्रेरणा-     ● प्रतियोगिता    ● सफलता द्वारा सफलता    ● प्रगति द्वारा पूर्व ज्ञान अब्राहम मैस्लो के अनुसार= 1 जन्मजात -  भूख, प्यास, काम, नींद 2 अर्जित -  (A) व्यक्तिगत- आदते, रुचि, अचेतन मन की दमित इच्छा (B)सामूहिक- सहयोग, युयुत्सा, सामुदायिकता गैरिट के अनुसार 1 जैविक- भूख,प्यास नींद काम 2 सामाजिक- आत्मचेतना, रचनात्मकता 3 मनोवैज्ञानिक- क्रोध, भय, प्रेम, सुख अभिप्रेरणा के सिद्धांत 1 मूल प्रवृत्ति सिद्धांत -  मैकडूगल को मूल प्रवृत्तियों का जनक माना जाता है ■ मैकडूगल ने भय संवेग  सबसे महत्वपूर्ण माना है  ■ मैकडूगल  ने 14 मूल प्रवृत्तियां बताई तथा प्रत्येक मूल प्रवृत्ति का एक संवेग बताया-    1 भय           -     पलायन    2 क्रोध      ...

चिंतन

  चिंतन  - किसी विषय पर सामान्य सोच विचार करने की क्षमता चिंतन कर लाती है ■  चिंतन मानसिक प्रक्रिया का ज्ञानात्मक पहलू है जिसमें आंतरिक रूप से प्रतिमा, चिह्नों, विचारों आदि के रूप में वस्तुओं और घटनाओं का मानसिक चित्रण करते हुए समस्या का समाधान ढूंढने का प्रयास किया जाता है ■ रॉस के अनुसार - चिंतन मानसिक क्रिया का ज्ञानात्मक पहलू है ■ गेरिट के अनुसार  - चिंतन एक अदृश्य व अव्यक्त व्यवहार है जिसमें मुख्य रुप से प्रतीकों का प्रयोग किया जाता है ■ मोहसीन के अनुसार -  चिंतन समस्त समस्या समाधान संबंधी अव्यक्त व्यवहार है ■ वैलेंटाइन के अनुसार  - चिंतन शब्द का प्रयोग उन क्रियाओं के लिए किया जाता है जिसमें श्रंखला वध विचार किसी पूर्व निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर आगे बढ़ते हैं ■ कॉलसैनिक के अनुसार  - संकल्पनाओं का पुनर्गठन ही चिंतन है ★ चिंतन प्रक्रिया की शुरुआत तब होती है जब व्यक्ति के सामने कोई समस्या आती है और उसका समाधान वह करना चाहता है चिंतन की प्रकृति ◆ चिंतन सभी प्रकार से एक ज्ञानात्मक प्रक्रिया है ◆ चिंतन एक मानसिक खोज है ◆ चिंतन किसी ...