अधिगम के कौशल - पठन कौशल
पढ़ना/पठन कौशल - विषय वस्तु को अर्थ ग्रहण करते हुए मनोयोग पूर्वक पढ़ना पठन कौशल कहलाता है
◆ यह सुनना व बोलना कौशल की तुलना में कठिन होता है
◆ विकास क्रम की स्थिति में इसका तीसरा स्थान है लेकिन मारिया मांटेसरी इसे अंतिम कौशल मानती है
■ इस कौशल द्वारा प्राप्त ज्ञान ज्यादा समय तक स्थायी रहता है
अतः इसे सर्वाधिक महत्वपूर्ण व स्थायी कौशल कहा जाता है
★ पठन की प्रक्रिया को चार भागों में विभाजित किया गया है
1 प्रत्याभिज्ञान
2 अर्थ ग्रहण
3 अनुप्रयोग
4 मूल्यांकन और प्रतिक्रिया
पठन कौशल में आने वाली कठिनाइयां
★ वर्ण पहचान में कठिनाई
★ बालक को वर्णों के उच्चारण स्थान का ज्ञान न होना
★ जिहवा दोष या दिव्यांगता
★ बालकों को होने वाली शंका
★ कठिन शब्दों के पठन में परेशानी
★ पूर्वाग्रह से ग्रसित
★ प्रयत्नलाघव (शब्द को छोटा करना)
★ क्षेत्रियता का प्रभाव
★ विद्यार्थी को व्याकरण के ज्ञान का अभाव
★ नाक से पठन (गुनगुनाते हुए)
पठन कौशल के विकास हेतु प्रयास-
● इस कौशल के विकास हेतु बालक को वर्णों का व उनके उच्चारण स्थानों का परिचय कराना चाहिए
● बालकों को व्याकरण का ज्ञान प्रदान करना चाहिए
● ध्वनि संकेत व विराम चिन्हों का ज्ञान भी करान चाहिए
● कठिन शब्द व उनके शब्दार्थ का अर्थ बताते हुए बार-बार अभ्यास कराया जाना चाहिए
● सरल से कठिन की ओर पढ़ाना चाहिए
● अध्यापक द्वारा आदर्श रूप में स्पष्ट पठन करना चाहिए
● बालकों को ज्यादा से ज्यादा व स्वतंत्र पठन करने देना चाहिए
● पठन के समय उचित आरोह अवरोह का ज्ञान भी बालक को प्रदान करना चाहिए
पठन के प्रकार
1 व्यक्ति की संख्या के आधार पर
( A) व्यक्तिगत पठन - एक समय में एक ही व्यक्ति द्वारा जो पठन किया जाता है वह व्यक्तिगत पठन कहलाता है
यह स्वयं उन दोनों रूपों में होता है या शिक्षक तथा शिक्षार्थी दोनों के द्वारा किया जाता है
(B ) सामूहिक वाचन- एक से अधिक छात्रों द्वारा किया गया पठन सामूहिक पठन कहलाता है
यह केवल शिक्षार्थी द्वारा किया जाता है
● सामूहिक पठन केवल सस्वर तो होता है लेकिन मौन नहीं होता, क्योंकि यदि सामूहिक पठन को मौन रूप दिया जाए तो वह सामूहिक होते हुए भी व्यक्तिगत बन जाता है क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति प्रत्येक विद्यार्थी की पढ़ने की स्वगति अलग-अलग होती है
2 ध्वनि के आधार पर
(A) सस्वर वाचन- आवाज के साथ विषय वस्तु को पढ़ना सस्वर वाचन कहलाता है
सस्वर वाचन शिक्षक व शिक्षार्थी दोनों द्वारा किया जाता है
इस वाचन के दो रूप होते हैं
(अ) आदर्श वाचन - कक्षा अध्यापक द्वारा विषय वस्तु को उचित आरोह अवरोह, पढ़ना आदर्श वाचन के लाता है यह व्यक्तिगत होता है
(ब) अनुकरण वाचन- अध्यापक द्वारा प्रस्तुत आदर्श वाचन को विद्यार्थियों द्वारा ठीक वैसा ही वाचन करना अनुकरण वाचन है
● यह व्यक्तिगत और सामूहिक दोनों प्रकार का होता है
(B) मौन वाचन- विषय वस्तु को बिना आवाज के या बिना ध्वनि के पढ़ना मौन वाचन कहलाता है
◆ यह पांचवी कक्षा से आरंभ किया जाना चाहिए
Note- अध्यापक द्वारा यह यह वाचन पूर्व तैयारी के रूप में किया जाता है
■ कक्षा कक्ष में मौन वाचन केवल विद्यार्थियों द्वारा किया जाता है
मौन वाचन के प्रकार
★ गंभीर मौन वाचन - किसी भी सारगर्भित विषय वस्तु का गहन अर्थ ग्रहण करने हेतु बालक द्वारा किया जाने वाला बिना ध्वनि का वाचन के गंभीर मौन वाचन कहलाता है
★ द्रुत मौन वाचन- किसी विषय वस्तु का दोहरान या विषय वस्तु का पठन-पाठन में किसी शब्द को ढूंढना आदि इन क्रियाओं के लिए किया गया वाचन द्रुत मौन वाचन कहलाता है
◆ मौन वाचन का उद्देश्य विद्यार्थियों में स्वाध्याय की प्रवृत्ति विकसित करना,कक्षा में अनुशासन स्थापित करना तथा पाठ्यक्रम को शीघ्र पूरा करना होता है
पठन कौशल की विधियां-
◆ वर्ण पठान विधि
◆ शब्द पठन विधि
◆ वाक्य पठन विधि
◆ आदर्श अनुकरण विधि
◆ चित्र पठन विधि
◆ ध्वनि साम्य विधि
◆ भाषा प्रयोगशाला विधि
◆ साहचर्य विधि
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