समायोजन के बाधक तत्व

 समायोजन के बाधक तत्व

1 संघर्ष / द्वंद - जब व्यक्ति के सम्मुख एक ही समय में दो समान महत्व की वस्तुएं उत्पन्न हो जाए और व्यक्ति को किसी एक का चयन करना पड़े तो उत्पन्न किया संघर्ष कहलाती है

(A) उपागम - उपागम द्वंद - जब व्यक्ति के समक्ष दो धनात्मक लक्ष्य हो

 उदाहरण-  पटवारी व ग्रामसेवक में से एक का चयन करना

(B) परिहार परिहार द्वंद - जब व्यक्ति के समय समक्ष दो नकारात्मक लक्ष्य हो 

उदाहरण आगे कुआं पीछे खाई

(C) उपागम - परिहार द्वंद- जब व्यक्ति के सामने एक तरफ एक तरफ परिस्थिति प्रतिकूल हो जबकि दूसरी तरफ अनुकूल परिस्थिति हो

2 तनाव - समय परिस्थिति के अनुसार आवश्यकता की पूर्ति न होने पर उत्पन्न किया तनाव कहलाती है समय पर नौकरी नहीं मिलना जरूरत के समय पैसों का नया होना

3 दबाव - सफलता असफलता एवं समाज में प्रतिष्ठा बनाए रखने हेतु उत्पन्न किया दबाव कहलाती है उदाहरण प्रतियोगिता छात्र द्वारा तैयारी करना

4 भग्नाशा - निरंतर प्रयास करने के उपरांत भी जब व्यक्ति को सफलता प्राप्त नहीं होती है तो वह निराश हो जाता है उसी निराशा को भग्नासा या कुंठा कहते हैं क्योंकि भग्नासा के कारण व्यक्ति कार्य करना बंद कर देता है उदाहरण दसवीं में बार-बार फेल होने पर पढ़ाई छोड़ ना

5 दुश्चिंता - जो व्यक्ति के चेतन मन की कोई इच्छा पूर्ण नहीं होती है तो वह ऐसे तन मन में चली जाती है परंतु समय परिस्थिति के प्रभाव से वह इच्छा पुणे ए चेतन से अचेतन मन में आने का प्रयास करें तो उत्पन्न किया दुश्चिंता कहलाती है उदाहरण किसी को कुछ कहने की इच्छा होने पर भी कहने पाना दुश्चिंता शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग सिगमंड फ्रायड ने किया

समायोजन की रक्षा युक्तियां 

1 प्रत्यक्ष 

2 अप्रत्यक्ष

1 प्रत्यक्ष युक्तियां

★ बाधाओं को दूर करना

★  संसाधनों में परिवर्तन करना 

★ उद्देश्यों का प्रतिस्थापन करना

★ विश्लेषण व निर्णय करना

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