सूक्ष्म शिक्षण के कौशल 2
सूक्ष्म शिक्षण के कौशल
5 प्रदर्शन कौशल - व्याख्या कौशल की नीरसता व इससे उत्पन्न अरुचि को दूर करने के लिए अध्यापक द्वारा विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष अनुभव कराने हेतु जिन कौशलो को प्रयोग में लाया जाता है वह प्रदर्शन कौशल में गिने जाते हैं
◆ इसमें अध्यापक द्वारा चित्र, मॉडल,प्रतिरूप, चार्ट, सारणी ग्राफ, वास्तविक सामग्री तथा रंगमंच का प्रयोग किया जाता है
◆मनोविज्ञान का मानना है कि करके सीखा हुआ ज्ञान अधिक स्थाई रहता है क्योंकि इसमें छात्र अधिक सक्रिय रहता है
◆ जितनी अधिक ज्ञानेंद्रियां सक्रिय रहती है प्राप्त ज्ञान उतना अधिक स्थाई होता है
◆इसका प्रयोग करते समय यदि छात्र सहभागिता ली जाती है तो पाठ में रुचि बढ़ जाती है
◆ प्रदर्शित सामग्री विषय वस्तु से संबंधित होनी चाहिए
◆ प्रदर्शित सामग्री विद्यार्थियों के स्तर के अनुकूल हो
◆ प्रदर्शित सामग्री कक्षा कक्ष के वातावरण के अनुकूल होनी चाहिए
◆अध्यापक को स्वयं भी एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत करना चाहिए ताकि विद्यार्थियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़े
◆ प्रदर्शन कौशल में जो विषय वस्तु पर सामग्री प्रदर्शित की जानी है अध्यापक को उसका पूर्वाभ्यास कर लेना चाहिए
6 पुनर्बलन कौशल - कक्षा कक्ष के वातावरण को अधिक प्रभावी बनाने हेतु विद्यार्थियों की प्रत्येक सही क्रिया पर उन्हें पुनर्बलन दिया जाना चाहिए ताकि पाठ में विद्यार्थियों की रुचि बढ़ सके
■ विद्यार्थियों के आत्मविश्वास में वृद्धि हो सके
■ कक्षा का वातावरण प्रभावी होगा तो अधिगम अधिक होगा
■विद्यार्थियों में विषयगत प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी जिससे मात्रात्मक और गुणात्मक परिणामों में वृद्धि होगी
■अध्यापक प्रभावशीलता में वृद्धि होती है
पुनर्बलन के प्रकार
1 सकारात्मक पुनर्बलन- विद्यार्थी की प्रत्येक सही अनुक्रिया पर या सही उत्तर देने पर अध्यापक द्वारा दिया गया पुनर्बलन सकारात्मक पुनर्बलन कहलाता है
2 नकारात्मक पुनर्बलन - विद्यार्थी द्वारा गलत अनुक्रिया से या गलत उत्तर देने पर अध्यापक द्वारा उसे रोकना नकारात्मक पुनर्बलन कहलाता है
पुनर्बलन दो तरीकों से दिया जाता है
1 शाब्दिक
2 अशाब्दिक
शाब्दिक सकारात्मक पुनर्बलन - हां हां, शाबाश, सही है, हां बिल्कुल
अशाब्दिक सकारात्मक पुनर्बलन- हां में सिर हिलाना, हाथ से स्वीकृति देना, हूं की ध्वनि करना
शाब्दिक नकारात्मक पुनर्बलन- नहीं रुको, गलत, बिल्कुल गलत, ऐसा नहीं होता, यह नहीं इत्यादि
अशाब्दिक नकारात्मक पुनर्बलन- ना में सिर हिलाना, आंख गडाकर देखना, ललाट पर सलवटे आना, हाथ से रुकने का संकेत, हाथ को झिड़क देना इत्यादि
7 श्यामपट्ट कौशल-
★ यह अध्यापक के लिए परम सहयोगी की भूमिका निभाता है
★इसे अध्यापक का दाहिना हाथ कहा जाता है
★यह कक्षा कक्ष में प्रयोग में ली जाने वाले दृश्य सहायक सामग्री है
★विद्यार्थियों का ध्यान केंद्रित करने में सहायक है
★छात्र अधिगम में वृद्धि होती है तथा अध्यापकों को विराम देता है
★इसका उपयोग विषय वस्तु से संबंधित चित्र बनाने में किया जाता है
★पाठ आरंभ से अंत तक जो पढ़ाया जाता है उसका नाम किया जाता है शिक्षण प्रभावी हो सके
★अध्यापक विषय वस्तु वस्तु से संबंधित चित्र बनाने में उपयोग करता है
★ गृह कार्य व मूल्यांकन प्रश्नों का उल्लेख भी श्यामपट्ट पर किया जाता है
कठिन शब्दार्थओं का उल्लेख भी श्यामपट्ट पर किया जाता है
★कठिन प्रश्नों के उत्तर का उल्लेख भी श्यामपट्ट पर किया जाता है
★यदि कोई तथ्य ज्यादा महत्वपूर्ण हो तो उसे रेखांकित कर देना आवश्यक है और यदि रेखांकित न करना चाहे तो अलग रंग की लेखनी या चॉक का प्रयोग किया जा सकता है
★ एक ही चित्र में अलग-अलग बातें दर्शानी हो तो अलग-अलग रंगों का प्रयोग करेंगे
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◆ इसका प्रयोग करते समय सहारा लेकर खड़ा नया होना चाहिए और श्यामपट्ट के सामने भी खड़ा खड़ा नहीं होना चाहिए
◆ श्यामपट्ट पर लेखन स्पष्ट होना चाहिए
◆ वर्ण, शब्द, वाक्यों की बनावट एक समान होनी चाहिए
◆ उचित विराम चिन्ह का प्रयोग किया जाना चाहिए
◆ श्यामपट्ट पर पंक्तियां सीधी होनी चाहिए
◆ श्यामपट्ट पर सभी मुख्य बातों का लेखन होना अति आवश्यक है
◆ चमकदार स्याही व रंगों का प्रयोग होना चाहिए
◆ श्यामपट्ट पर लेखन के समय अध्यापक व श्यामपट्ट के मध्य लगभग 45 डिग्री का कोण बनना चाहिए
◆ कक्षा छोड़ने से पूर्व श्यामपट्ट को साफ कर देना चाहिए
◆ श्यामपट्ट सदैव ऊपर से नीचे की ओर साफ किया जाना चाहिए
◆ एक कक्षा कक्ष में श्यामपट्ट का होना अनिवार्य है
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