सूक्ष्म शिक्षण के प्रमुख कौशल
सूक्ष्म शिक्षण के कौशल
1 प्रस्तावना कौशल =
★ इस कौशल का संबंध पाठ के आरंभ के पूर्व से है इसके द्वारा विद्यार्थियों के पूर्व ज्ञान की खोज की जाती है
★ इसमें वे प्रश्न होते हैं जो विद्यार्थियों के पूर्व ज्ञान पर निर्भर करते हैं इसका संबंध कक्षा में पढ़ाने के पूर्व से होता है अथार्थ इसे पाठ योजना का हिस्सा माना जाता है
★ इस कौशल में प्रश्नों के माध्यम से प्रकरण तक पहुंचा जाता है
★ प्रश्न पूछते समय यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि प्रश्नों में तारतम्यता का गुण हो
★ प्रथम प्रश्न के उत्तर से अगला प्रश्न आरंभ करना चाहिए
★ प्रश्नों का स्तर विद्यार्थियों के पूर्व ज्ञान से अधिक ना हो
★ प्रश्न स्पष्ट होने चाहिए, प्रश्न संक्षिप्त होने चाहिए
★ अंतिम प्रश्न समस्यात्मक होना चाहिए ताकि प्रकरण का नाम घोषित किया जा सके
★इस कौशल का समय अधिकतम 5 से 7 मिनट होता है
★ इसमें प्रश्नों के अतिरिक्त लघुकथा, चार्ट, प्रतिरूप का भी सहारा लिया जा सकता है
2 प्रश्न सहजता कौशल =
◆ इस कौशल के अंतर्गत अध्यापक को अभ्यास कराया जाता है कि पूछे जाने वाले प्रश्न भाषा की दृष्टि से सरल होने चाहिए
◆ उत्तर के रूप में चाही गई सामग्री स्पष्ट होनी चाहिए
◆ विद्यार्थियों को उनके स्तर के अनुकूल प्रश्न पूछने चाहिए
◆प्रश्न विषय वस्तु से संबंधित होने चाहिए, विद्यार्थियों की रुचि व सक्रियता में वृद्धि करने वाले हो
◆प्रत्येक प्रश्न का उत्तर निश्चित होना चाहिए
◆अध्यापक को अपने धैर्य का परिचय देना चाहिए ताकि विद्यार्थियों को आत्मव्यक्ति के समुचित अवसर प्राप्त हो सके
3 खोजपूर्ण प्रश्न कौशल =
●इसमें पाठ प्रक्रिया के अंतर्गत पूछे जाने वाले प्रश्न है
● विषय वस्तु का गहराई से या गहनता से अध्ययन कराने हेतु अध्यापक द्वारा जिन प्रश्नों का प्रयोग किया जाता है वह खोजपूर्ण प्रश्न कहलाते हैं
●प्रश्नों में उत्तर का संकेत होता है
●यदि विद्यार्थी प्रश्न का जवाब नहीं दे पाते तो उन्हें अन्य प्रश्नों के माध्यम से सही उत्तर तक ले जाया जाता है
●यह प्रश्न विद्यार्थियों की चिंतन शक्ति में वृद्धि करते हैं, आत्मबल में वृद्धि करते हैं
● इन प्रश्नों की भाषा भी सरल होनी चाहिए और विषय वस्तु से संबंध भी होना चाहिए इन प्रश्नों में सरल से कठिन की ओर शिक्षण सूत्र का प्रयोग करते हैं
●विषय वस्तु पर अंतिम व्याख्यान अध्यापक प्रस्तुत करता है
4 व्याख्या कौशल =
■किसी प्रकरण का विस्तार बताना व्याख्यान होता है
■माना जाता है कि व्याख्या विधि नीरस विधि है यह और ज्यादा निराश ना हो इसके लिए इसको साल में पर्याप्त अभ्यास आवश्यक है
■व्याख्यान के समय ध्यान रखा जाना चाहिए की भाषा शैली स्पष्ट व सरल हो
■व्याख्यान विषय वस्तु पर निर्भर होना चाहिए क्योंकि व्याख्यान के समय प्रकरण से भटक जाने का खतरा सर्वाधिक होता है
■अध्यापक को वाक चातुर्य का ज्ञान होना चाहिए
■अध्यापक को विषय वस्तु का भी पर्याप्त ज्ञान होना चाहिए
■व्याख्यान देते समय अध्यापक को व्यक्तिगत विभिन्नता का
ध्यान रखा जाना चाहिए
■व्याख्यान विद्यार्थियों के स्तर के अनुकूल होना चाहिए
■अध्यापक द्वारा श्यामपट्ट व अन्य सहयक सामग्रियों का प्रयोग किया जाना चाहिए
■ व्याख्यान के समय पर्याप्त उदाहरण भी व्याख्यान में शामिल किए जाने चाहिए
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