Posts

Showing posts from June, 2021

बीएस ब्लूम के शैक्षिक उद्देश्यों का वर्गीकरण

बी एस ब्लूम ने अपनी पुस्तक शैक्षिक उद्देश्यों का वर्गीकरण के अंतर्गत शैक्षिक उद्देश्यों को तीन भागों में बांटा-  1 संज्ञानात्मक पक्ष -  इस पक्ष के उद्देश्यों का वर्गीकरण बी एस ब्लूम द्वारा 1956 में किया गया ◆  इसका संबंध बौद्धिक क्षमताओं से होता है ● ब्लूम ने इसके अंतर्गत 6 उद्देश्य निर्धारित किए (A) ज्ञान  - सूचनाओं, तथ्यों तथा संप्रत्यो की जानकारी अर्जित करना, पहचानना, आंकड़ों का प्रत्यास्मरण करना (B) अवबोध  -  सीखे गए ज्ञान पर समझ विकसित करना, तुलना करना, अंतर करना, संबंध स्थापित करना, वर्गीकरण करना (C) अनुप्रयोग - सीखे गए व समझे गए ज्ञान का व्यावहारिक परिस्थितियों में प्रयोग करना (D) विश्लेषण -  सीखे गए ज्ञान के विभिन्न खंडों को पृथक कर अलग अलग कर उनके खंड बनाना तथा उनका समाधान करना (E) संश्लेषण  - विश्लेषण के पश्चात अलग-अलग खंडों को पुनः संगठित करना उनके आधार पर उनके आधार पर नवीन निष्कर्ष का सृजन करना (F) मूल्यांकन - सीखी गई विषय वस्तु की जांच करना कि वह किस सीमा तक आत्मसात हुई उतार कितना अपेक्षित विकसित व्यवहार गत परिवर्तन हुआ 2 भा...

गद्य शिक्षण की विधियां

 गद्य शिक्षण की विधियां महत्व   ● शब्द भंडार में वृद्धि  ● सृजनात्मक क्षमता का विकास ● व्याकरण का ज्ञान  ● लिपि का ज्ञान  ● उच्चारण का ज्ञान  ● गद्य की विभिन्न विधाओं का ज्ञान ●  मानसिक बौद्धिक व तार्किक क्षमता का विकास 1 अर्थ कथन विधि  -  ◆ इस विधि में अध्यापक गद्य का मौखिक पठन करता है पठन के साथ-साथ कठिन शब्दों के अर्थ बताए जाते हैं  ◆ अध्यापक अपनी ओर से सब कुछ बताता है विद्यार्थी निष्क्रिय श्रोता के रूप में रहते हैं  ◆ इस विधि में बच्चों को सोचने समझने का अवसर नहीं मिलता है ◆ बच्चों में न तो अर्थ ग्रहण क्षमता का विकास होता है और ना ही विचारों को अभिव्यक्त करने की क्षमता का विकास होता है इस कारण यह एक नीरस विधि है 2 समीक्षा विधि - ◆ इस विधि में गद्य के तत्वों का विश्लेषण कर उसके गुण दोष परखे जाते हैं  ◆ इस विधि में अध्यापक निष्क्रिय व छात्र सक्रिय रहता है यह स्वतंत्र विधि नहीं है बल्कि पूरक विधि है  ◆ उच्च कक्षा में उपयोगी इस विधि में अध्यापक प्रश्नोत्तर व्याख्या एवं कथन के माध्यम से नाटक के तत्वो की समीक्षा करता है 3 वि...

Ncf-2005

  Ncf-2005 (राष्ट्रीय पाठ्यचर्या कार्यक्रम 2005) ◆ सर्वप्रथम ncf-2005 का विचार NPE -1986 के तहत किया गया  ◆ NPE-1986 में इस बात पर बल दिया गया कि पाठ्यचर्या को राष्ट्रीय चरित्र के निर्माण की पृष्ठभूमि तैयार करनी चाहिए ◆ NPE-1986 के तहत पाठ्यचर्या राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली को विकसित करने का साधन है  ◆ POA - 1992 ( प्रोग्राम ऑफ एक्शन ) में प्रसंगिकता, गुणवत्ता, लचीलापन के तत्वों पर बल दिया और NPE के प्रावधानों का क्रियान्वयन किया  ■ 1993 में यशपाल शर्मा समिति ने कहा की बालकों को तनावमुक्त व बिना बोझ की शिक्षा प्रदान की जाए  ■ स्कूली शिक्षा के विकास हेतु पाठ्यचर्या का निर्माण MHRD द्वारा किया गया  ◆ NCF-2005 विद्यालय शिक्षा का सबसे नवीनतम दस्तावेज माना जाता है  ◆ NCF-2005 का निर्माण का प्रमुख उद्देश्य बालकों के सामाजिक गुणों का विकास करने तथा उन्हें सुयोग्य नागरिक बनाने से है इसी कारण ncf-2005 में समाजिक अध्ययन जैसा नवीन विषय जोड़ा गया ■ NCF-1975 (first) ■ NCF-1988 (second) ■ NCFSE - 2000 (third) ■ NCF-2005  ★ NCF-2005 का निर्माण रविंद्र नाथ टैगोर के...

हिंदी शिक्षण विधियां- पद्य शिक्षण की विधियां

  शिक्षण विधि  - किसी शिक्षक के द्वारा कक्षा कक्ष मैं अपने विषय वस्तु को पढ़ाने या प्रस्तुत करने का जो तरीका काम में लिया जाता है उसे शिक्षण विधि का जाता है  ◆ यह एक शिक्षक एवं कक्षा कक्ष को ही प्रभावित करता है जिसके कारण शिक्षण विधि का क्षेत्र सीमित माना जाता है  शिक्षण प्रणाली  - एक विद्यालय में सुबह से लेकर शाम तक जो गतिविधियां संचालित होती हैं उनके तरीके को ही शिक्षण प्रणाली कहा जाता है ◆  शिक्षण प्रणाली संपूर्ण विद्यालय को प्रभावित करती है जिसके कारण इसका क्षेत्र व्यापक माना जाता है भाषा शिक्षण के रूप 1 पद्य  2  गद्य   3 व्याकरण   4 रचना   पद्य शिक्षण के उद्देश्य   ◆ रसानुभूति ◆ कल्पना शक्ति का विकास ◆ कविता के प्रति रुचि व प्रेम उत्पन्न करना ◆ कविता सृजन की शक्ति उत्पन्न करना ◆ छंद अलंकार रस आदि का ज्ञान देना ◆ छात्रों को अपने देश की संस्कृति धर्म दर्शन आदि की जानकारी देना पद्य शिक्षण की विधियां   गीत विधि-  अध्यापक बालकों को छोटे-छोटे बाल गीतों के माध्यम से कविता का शिक्षण कराता है  ◆ प्राथमिक स्तर के...

शिक्षण अधिगम प्रक्रिया पार्ट 2

  शिक्षण द्विमुखी प्रक्रिया -  एडम्स महोदय ने शिक्षा को त्रिमुखी प्रक्रिया माना है जिसके दो ध्रुव निम्न है  1  शिक्षक   2  शिक्षार्थी शिक्षण त्रिमुखी प्रक्रिया- जॉन डीवी के अनुसार शिक्षण त्रिमुखी प्रक्रिया है शिक्षक व शिक्षार्थी के मध्य अंतः क्रिया होती है जो पाठ्यक्रम पर आधारित होती है अतः शिक्षण प्रक्रिया के तीन महत्वपूर्ण अंग निम्न है- 1 शिक्षक 2 शिक्षार्थी 3 पाठ्यक्रम शिक्षक  - शिक्षण प्रदान करने की महत्वपूर्ण धुरी  ■ फ्रोबेल ने अपनी शिक्षा प्रणाली में शिक्षक को बालोद्यान का कुशल माली कहा है  ■ रविंद्र नाथ टैगोर के अनुसार - एक अच्छा शिक्षक तभी अच्छा अध्यापन करवा सकता है जब वह स्वयं अध्ययनरत रहता हो, एक जलता हुआ दीपक की दूसरे दीपक को प्रज्वलित कर सकता है  कॉलसैनिक के अनुसार - शिक्षा मनोविज्ञान शिक्षक विशेष को यह निर्णय करने में सहायता दे सकता है कि वह विशिष्ट परिस्थितियों में अपनी विशिष्ट समस्याओं का समाधान किस प्रकार करें शिक्षक की कुशलता   विषय का पूर्ण ज्ञान हो  बालकों के प्रति प्रेम व सहानुभूति पूर्ण व्यवहार कर...

भाषा शिक्षण के उपागम

भाषा शिक्षण के उपागम- किसी भी भाषा शिक्षण उपागम को समझना एक सैद्धांतिक दृष्टिकोण है की भाषा क्या है और इसे कैसे सीखा जा सकता है  ◆ कुछ सिखाने का तरीका जो सीखने वालों की मदद के लिए कक्षा की गतिविधियों या  तकनीक का उपयोग किया जाता है उपागम की श्रेणी में आता है ◆  उपागम शिक्षण विधियों को जन्म देता है  ◆ शिक्षण विधियां उपागम पर आधारित होती है  ■ वर्तमान समय में उपागम के अंतर्गत सिद्धांत और आधार सम्मिलित किए जाते हैं जिनका अनुसरण करते हुए पाठ्यक्रम का आयोजन किया जाता है और इन्हीं के आधार पर शिक्षण विधियों का चयन किया जाता है  ◆ किसी भी पाठ को पढ़ाने के लिए एक पाठ योजना बनाई जाती है  ■ पाठ योजना में बच्चों को पाठ समझाने के दृष्टिकोण हेतु अनेक शिक्षण विधियों का प्रयोग करते हैं ■  इस प्रक्रिया में पाठ योजना एक उपागम है और जिन तरीकों से उस पाठ योजना में शिक्षण कार्य करवाते हैं वह  शिक्षण विधियां है  पाठ योजना उपागम-  पाठ योजना का जन्म गेस्टाल्ट मनोविज्ञान से हुआ  ◆ योजना से आशय किसी कार्य को करने से पहले सोचना विचारना और आवश्यकता और क...

शिक्षण अधिगम प्रक्रिया पार्ट 1

  शिक्षण अधिगम प्रक्रिया  ◆ शिक्षण का अर्थ बालक को शिक्षक के द्वारा विभिन्न विषयों का अधिगम करवाना  ■ शिक्षण व अधिगम में गहरा संबंध है संकुचित अर्थ - निश्चित समय में निश्चित स्थान पर निश्चित शिक्षण विधियों द्वारा बालक को पूर्व नियोजित ढंग से शिक्षण प्रदान करना  ◆ इस प्रक्रिया में शिक्षक का स्थान महत्वपूर्ण है शिक्षण के व्यापक अर्थ में -  औपचारिक तथा अनौपचारिक दोनों साधनों का प्रयोग सम्मिलित है ■ शिक्षा शब्द अंग्रेजी भाषा के एजुकेशन शब्द का हिंदी रूपांतरण है ◆  एजुकेशन शब्द लेटिन भाषा के एजुकेटम शब्द से निकला है यह दो शब्दों से मिलकर बना है ई और ड्यूको ■ ई का अर्थ है अंदर से तथा ड्यूको का अर्थ है आगे बढ़ना ★ इस प्रकार शाब्दिक रूप से एजुकेटम का अर्थ है अंदर से बाहर की ओर बढ़ना अथार्थ शिक्षा व्यक्ति की आंतरिक शक्तियों को विकसित करने की प्रक्रिया है रॉबर्ट गेने के अनुसार -  शिक्षण का तात्पर्य अधिगम की दशा को व्यवस्थित करना जोकि अधिगम अधिगमकर्ता की बह्ययता से संबंधित है बर्ट के अनुसार - शिक्षण अधिगम हेतु प्रेरणा, पथ प्रदर्शक व प्रोत्साहन है डंक...

Psychology unit 3

  विशिष्ट बालक-   मनोवैज्ञानिक विचारधारा के अनुसार प्रत्येक बालक विशिष्ट होता है अपार जो बालक औसत दर्जे के बालकों से भिन्न होता है विशिष्ट बालक कहलाता है प्रतिभाशाली बालक -  वह बालक जो सामान्य बालकों की तुलना में श्रेष्ठ व्यवहार का प्रदर्शन करता है प्रतिभाशाली बालक कहलाता है  टर्मन के अनुसार -  जिन बालकों की बुद्धि लब्धि 140 से अधिक होती है प्रतिभाशाली बालक कहलाते हैं  स्किनर के अनुसार -  प्रतिभाशाली शब्द कक्षा के उन 1 प्रतिशत बालकों के लिए प्रयुक्त किया जाता है जो सबसे अधिक बुद्धिमान होते हैं  कॉल सैनिक के अनुसार -  प्रतिभाशाली बालक प्रत्येक क्षेत्र में श्रेष्ठ होते हैं तथा समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं  बर्ट के अनुसार -  प्रतिभाशाली बालक जन्मजात होते हैं इन्हें बनाया नहीं जा सकता  क्रो एंड क्रो के अनुसार-  शारीरिक संरचना की दृष्टि से प्रतिभाशाली बालक अन्य बालकों से भिन्न होते हैं जेम्स ड्रेवर के अनुसार -  सामान्य रूप से किसी क्षेत्र में उच्च बौद्धिक क्षमता रखने वाला बालक प्रतिभाशाली बालक होता है ...

सृजनशील बालक

सृजनशील बालक-  जो बालक स्वयं की प्रेरणा तथा नये विचारों भावनाओ के साथ मौलिक कार्यों को करने की क्षमता जिन बालको में पाई जाती है, सृजनशील बालक कहलाते है सृजनशील बालको की पहचान ◆ अन्य बालको की अपेक्षा अधिक कुशल ◆ इन की IQ उच्च होती है ◆ समायोजन तथा जोखिम उठाने वाले ◆ इनका व्यक्तित्व जटिल होता है ◆ बहिर्मुखी व्यक्तित्व सृजनात्मक बालको की विशेषता  ◆ कल्पनाशीलता की प्रधानता ◆ मौलिकता का गुण ◆ संवेदनशीलता ◆ नमनीयता/ लोचशीलता ◆ विस्तारण ◆ समस्या समाधान की योग्यता ◆ कार्य मे निष्ठा ◆ जोखिम उठाने का उत्सुक ◆ उच्च ग्रहण क्षमता ◆ उच्च निर्णय क्षमता ◆ संवेगो मे स्थिरता सृजनात्मकता-  किसी परंपरागत वस्तु में नवीन विशेषता उत्पन्न करने की मौलिक प्रक्रिया सृजनात्मकता क्या लाती है  ● सृजनात्मकता में नवीन वस्तुओं का निर्माण तो होता ही है किंतु पुरानी वस्तुओं के मौलिक गुण नष्ट नहीं होते  ◆ सृजनात्मकता अंग्रेजी के क्रिएटिविटी शब्द का हिंदी रूपांतरण है जिसकी उत्पत्ति creat शब्द से मानी जाती है जिसका शाब्दिक अर्थ पैदा करना से होता है ● क्रो एंड क्रो के अनुसार-  सृजनात्मकता मौलिक...

अधिगम के कौशल = सुनना - बोलना - पढ़ना - लिखना

अधिगम के कौशल - बालक में सीखने की योग्यता का विकास वातावरण व उसके अभ्यास पर निर्भर करता है  सीखने की योग्यता बालक में व्यवहार परिवर्तन निर्धारित करती है  ★ बालक में सीखने हेतु 4 अवयव माने जाते हैं    1 सुनकर 2  बोलकर 3 पढ़कर  4 लिखकर  ■ सीखने के अवयवों में दक्षता लाना ही अधिगम के कौशल है  ■  कौशलों की संख्या 4 है -      सुनना ---  बोलना --- पढ़ना --- लिखना  ■ एक बालक में इनका विकास क्रम-      सुनना - बोलना -पढ़ना -लिखना  मनोवैज्ञानिक क्रम=  सुनना -बोलना- पढ़ना- लिखना  फ्रोबेल महोदय के अनुसार  =  सुनना - बोलना - पढ़ना - लिखना साहचर्य विधि के प्रवर्तक महोदया मारिया मोंटेसरी के अनुसार =    सुनना - बोलना - लिखना - पढ़ना (अंतिम दो का क्रम बदल दिया)  और कहा कि बालक को लिखने से पहले पढ़ना सिखाना मुद्रण पर भोकने के समान है ★ बोलना कौशल, सुनना कौशल पर निर्भर करता है ★ लिखना कौशल, पढ़ना कौशल पर निर्भर करता है  ★ सुनना व बोलना कौशल का संबंध मौखिक रूप से होता है  ★ ...