सम्पूर्ण अधिगम यूनिट 4
अधिगम=अधिगम शब्द अंग्रेजी के LEARNING का हिंदी रूपांतरण है जिसका शाब्दिक अर्थ - सीखना अथवा ग्रहण करना होता है
परिभाषाएं
अधिगम अंतरण = जब एक स्थिति में सीखा हुआ ज्ञान दूसरी स्थिति में प्रयोग किया जाता है तो उसे अधिगम अंतरण कहते हैं
अधिगम को प्रभावित करने वाले कारक =
अधिगम निर्योग्यता
अधिगम के सिद्धांत
1 व्यवहारवाद के अनुसार
1 उद्दीपक अनुक्रिया सिद्धांत- (stimulus response theory)=प्रवर्तक- थोर्नडाइक (अमेरिका )
4पुनर्बलन का सिद्धांत - प्रतिपादक - क्लार्क हल
अन्य नाम
■ प्रबलन का सिद्धांत
■ व्यवस्थित व्यवहार का सिद्धांत
■चालक न्यूनता सिद्धांत
■सबलीकरण सिद्धांत
● हल का सिद्धांत थार्नडाइक व पॉवलाव के सिद्धांत पर आधारित है
●हल ने अपने सिद्धांत में आवश्यकता पूर्ति पर सर्वाधिक बल दिया
■ हल ने अपने प्रयोग निम्न प्रकार से किए
1 भूखी बिल्ली को puzzal बॉक्स में बिठाया वह बाहर मछली का टुकड़ा रखा तो बिल्ली ने प्रयास करते हुए दरवाजा खोला
2 बिल्ली को भरपेट भोजन करवाकर puzzal बॉक्स में बिठाया और बाहर मछली का टुकड़ा रखा परंतु इस बार बिल्ली ने दरवाजा खोलने का प्रयास नहीं किया
इन प्रयोगों के आधार पर हल ने सिद्ध किया कि बिल्ली को भूख की आवश्यकता थी तो उसने प्रयास किया परंतु जब बिल्ली को आवश्यकता नहीं थी तो उसने बाहर आने का प्रयास ही नहीं किया तथा अर्थ प्राणी उसी कार्य को बार-बार करता है जिस कार्य को करने से उसकी आवश्यकता की पूर्ति होती है और आवश्यकता पूर्ति उस प्राणी के लिए पुनर्बलन होता है
●व्यक्ति की आवश्यकता कभी समाप्त नहीं होती है अतः व्यक्ति की सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती
●हल के अनुसार व्यक्ति अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए व्यवस्थित एंव क्रमबद्ध रूप से व्यवहार करता है
● स्किनर ने लिखा कि आज तक का अधिगम का हल का सिद्धांत सर्वश्रेष्ठ सिद्धांत है
■ लेस्टर एंडरसन के अनुसार- हल का सिद्धांत नपे तुले शब्दों का सिद्धांत है
शैक्षिक महत्व
1 आवश्यकता आपूर्ति पर बल
2 बालक को आवश्यकता अनुसार शिक्षण देना चाहिए
3 सकारात्मक पुनर्बलन पर बल
4 क्रमबद्ध व्यवहार द्वारा आवश्यकता पूर्ति संभव
5 प्रतिस्थापन सिद्धांत - प्रतिपादक - एडविन गुथरी
★ प्रतिस्थापन से आशय - किसी पूर्व अनुभव का नवीन परिस्थितियों में अनुप्रयोग कर समस्या समाधान करने की मानसिक प्रक्रिया प्रतिस्थापन कहलाती है
■ गुथरी के अनुसार जब उद्दीपक व अनुक्रिया दोनों एक साथ प्रस्तुत हो जाए तो दोनों के मध्य एक संबंध का निर्माण हो जाता है, गुथरी ने 3 वर्षीय बालक व खरगोश पर प्रयोग कर निष्कर्ष निकाला कि उदीपक व अनुक्रिया के बीच समीपता स्थापित करनी चाहिए ताकि अधिगम की प्रक्रिया को प्रभावी बनाया जा सके
■ एडविन गुथरी ने अपने सिद्धांत का प्रतिपादन करने हेतु खरगोश और चूहे पर प्रयोग किया
■ गुथरी एक परंपरावादी मनोवैज्ञानिक हैं
■ गुथरी के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक जीवन की समस्याओं का समाधान इसी सिद्धांत के आधार पर करता है
■ गुथरी स्किनर के सिद्धांत से असहमत थे
■ गुथरी ने अनुभव द्वारा सीखने पर सर्वाधिक बल दिया
अभिप्रेरणा- अंग्रेजी के motivation का हिंदी रूपांतरण है जिसकी उत्पत्ति लेटिन भाषा के motum/ movere से हुई है जिसका अर्थ है to move या गति करना
■ किसी कार्य को प्रारंभ कर उसे जारी रख निश्चित उद्देश्य तक पहुंचाने की प्रक्रिया अभिप्रेरणा कहलाती है
■ अभिप्रेरणा एक आंतरिक दशा है जो व्यक्ति को कार्य करने के लिए प्रेरित करती है
■ अभिप्रेरणा एक ऐसा प्रेरक बल है जो व्यक्ति को भावात्मक रूप से जागृत करते हुए लक्ष्य प्राप्त करने की ओर अग्रसर करता है, धक्का देता है अथवा गति प्रदान करता है
■ अभिप्रेरणा मनोविज्ञान का प्रथम सिद्धांत माना जाता है
■ अभिप्रेरणा को अधिगम का हृदय, आत्मा व राजमार्ग माना जाता है
अभिप्रेरणा की विशेषताएं
★ अधिगम का सर्वोत्तम सोपान है
★ अधिगम का स्वर्ण पथ है
★ अधिगम का सर्वोच्च राजमार्ग है
★ अधिगम का हृदय है
★ अधिगम का मुख्य चालक है
★ अभिप्रेरणा व्यक्ति में निरंतरता लाती है
★ अभिप्रेरणा अधिगम की अनिवार्य स्थिति है
★ अभिप्रेरणा एक आंतरिक उत्तेजना है जो व्यक्ति को भावात्मक रूप से जाग्रत करती है
★ अभिप्रेरणा व्यक्ति को चयनात्मक क्रिया करने के लिए प्रेरित करती है
★ अभिप्रेरणा में व्यक्ति का व्यवहार लक्ष्य निर्देशित होता है
★ अभिप्रेरणा एक साधन है साध्य नही
अभिप्रेरणा की परिभाषाएं
कार्टर गुड के अनुसार- किसी कार्य को आरंभ करने उसे जारी रखने तथा नियंत्रित करने की प्रवृत्ति ही अभिप्रेरणा है
वुडवर्थ के अनुसार - अभिप्रेरणा व्यक्ति की वह है जो किसी निश्चित उद्देश्य की पूर्ति हेतु निश्चित व्यवहार करने के लिए प्रेरित करती है
स्किनर के अनुसार - अभिप्रेरणा अधिगम का सर्वोच्च राजमार्ग है
क्रेचफील्ड के अनुसार- अभिप्रेरणा हमारे क्यों का उत्तर देती है
अभिप्रेरणा के स्त्रोत
1 आवश्यकता - प्रत्येक व्यक्ति की कोई न कोई आवश्यकता होती है जो उसे अभिक्रिया करने के लिए प्रेरित करती है
उदाहरण - भोजन
2 चालक - प्रत्येक आवश्यकता से जुड़ा एक चालक होता है उदाहरण - भोजन से जुड़ा चालक भूख
3 प्रोत्साहन- उद्दीपक सामने होने पर व्यक्ति क्रिया करने के लिए प्रेरित होता है तथा उद्दीपक के मिलने पर चालक शांत हो जाता है तथा तनाव समाप्त हो जाता है
उदाहरण- भोजन सामग्री
अभिप्रेरणा के प्रकार
1 आंतरिक अभिप्रेरणा - अभिप्रेरणा के इस भाग में व्यक्ति अपनी शारीरिक आवश्यकता की पूर्ति करने हेतु कार्य करता है इस कारण इसे शारीरिक अभिप्रेरणा कहा जाता है
★अभिप्रेरणा के इस भाग में व्यक्ति को कार्य करने हेतु किसी बाह्य शक्ति की आवश्यकता नहीं होती इसमें व्यक्ति स्वयं की इच्छा से कार्य करता है
★अभिप्रेरणा के इस भाग में किया गया कार्य श्रेष्ठ होता है तथा व्यक्ति को आत्म संतुष्टि भी सर्वाधिक होती है
प्रेरक तत्व - भूख प्यास नींद काम
2 बाह्य अभिप्रेरणा - अभिप्रेरणा के इस भाग में व्यक्ति स्वयं की इच्छा से कार्य कर समाज में मान-मर्यादा प्रतिष्ठा को बनाए रखने हेतु कार्य करता है
प्रेरक तत्व - दंड, पुरस्कार, निंदा, अपमान
■ प्रेरक शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग वुडवर्थ द्वारा अमेरिका में किया गया
अभिप्रेरणा का वर्गीकरण=
चिंतन - किसी विषय पर सामान्य सोच विचार करने की क्षमता चिंतन कर लाती है
■ चिंतन मानसिक प्रक्रिया का ज्ञानात्मक पहलू है जिसमें आंतरिक रूप से प्रतिमा, चिह्नों, विचारों आदि के रूप में वस्तुओं और घटनाओं का मानसिक चित्रण करते हुए समस्या का समाधान ढूंढने का प्रयास किया जाता है
■ रॉस के अनुसार- चिंतन मानसिक क्रिया का ज्ञानात्मक पहलू है
■ गेरिट के अनुसार - चिंतन एक अदृश्य व अव्यक्त व्यवहार है जिसमें मुख्य रुप से प्रतीकों का प्रयोग किया जाता है
■ मोहसीन के अनुसार - चिंतन समस्त समस्या समाधान संबंधी अव्यक्त व्यवहार है
■ वैलेंटाइन के अनुसार - चिंतन शब्द का प्रयोग उन क्रियाओं के लिए किया जाता है जिसमें श्रंखला वध विचार किसी पूर्व निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर आगे बढ़ते हैं
■ कॉलसैनिक के अनुसार - संकल्पनाओं का पुनर्गठन ही चिंतन है
★ चिंतन प्रक्रिया की शुरुआत तब होती है जब व्यक्ति के सामने कोई समस्या आती है और उसका समाधान वह करना चाहता है
चिंतन की प्रकृति
◆ चिंतन सभी प्रकार से एक ज्ञानात्मक प्रक्रिया है
◆ चिंतन एक मानसिक खोज है
◆ चिंतन किसी लक्ष्य या उद्देश्य की ओर अग्रसर होता है
◆ चिंतन समस्या समाधान संबंधी व्यवहार है
◆ चिंतन एक आंतरिक प्रक्रिया है
◆ चिंतन के समय बाहरी गत्यात्मक क्रियाएं बंद हो जाती है
चिंतन के प्रकार
प्रत्यक्ष चिंतन- प्रत्यक्ष बोध या प्रत्यक्षीकरण इस चिंतन का आधार है
अमूर्त चिंतन - उददीपक की अनुपस्थिति में किया गया चिंतन
तार्किक चिंतन - यह उच्च स्तर का चिंतन है इसमें समस्या का समाधान किया जाता है
★ जिम्बार्डो व रुक ने चिंतन के दो प्रकार बताए हैं
1 स्वली चिंतन - इसमें व्यक्ति अपने काल्पनिक विचारों की अभिव्यक्ति करता है इसमें किसी समस्या का समाधान नहीं होता
उदाहरण - स्वपन, अभिलाषा
2 यथार्थवादी चिंतन- इसका संबंध वास्तविकता से होता है इसके सहारे व्यक्ति किसी भी समस्या का समाधान कर लेता है
यथार्थवादी चिंतन को तीन भागों में बांटा गया है
1अभिसारी चिंतन/निगमनात्मक चिंतन - इस चिंतन में व्यक्ति दिए गए तथ्यों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने की कोशिश करता है
2 अपसारी चिंतन/आगमनात्मक चिंतन/सृजनात्मक चिंतन - इसमें व्यक्ति दिए गए तथ्यों में अपनी ओर से कुछ नया पत्थर जोड़ कर एक निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचता है
3 आलोचनात्मक चिंतन- इस चिंतन में व्यक्ति किसी वस्तु तथ्य आदि के सारे गुण दोषों को परख लेने के पश्चात ही निष्कर्ष पर पहुंचता है
चिंतन का विकास
◆ चिंतन का विकास भाषा विकास के कुछ समय बाद प्रारंभ हो जाता है
◆ बालक में सर्वप्रथम प्रत्यक्ष-आत्मक चिंतन का विकास प्रारंभ होता है वह अपने चारों ओर मूर्त वस्तुओं के संबंध में चिंतन प्रारंभ करता है
■ पियाजे का विचार है कि 7 वर्ष तक बालक की प्रवृत्ति आत्मकेंद्रित होने के कारण स्वयं के संबंध में ही अधिक चिंतन करता है
★ इसके पश्चात कल्पनात्मक चिंतन तथा उसके बाद प्रत्ययात्मक चिंतन प्रारंभ हो जाता है
■ आयु बढ़ने के साथ-साथ चिंतन में तर्क की प्रधानता बढ़ती जाती है और तार्किक चिंतन का विकास हो जाता है
चिंतन की विशेषता
★ चिंतन में मानसिक प्रक्रिया निहित है
★ चिंतन के लिए किसी प्रकार की समस्या का होना आवश्यक है
★ चिंतन स्थूल से सूक्ष्म की ओर चलता है
★ चिंतन में विश्लेषण में संश्लेषण की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है
★ चिंतन को रुचि, अभिप्रेरणा, संप्रत्यय, वातावरण, भाषा, व्यक्तित्व आदि प्रभावित करते हैं
समस्या समाधान - समस्या समाधान उपागम हंट द्वारा दिया गया, यह उच्च स्तरीय उपागम माना जाता है इसमें सृजनात्मक चिंतन निहित रहता है
★ जब व्यक्ति के सामने समस्या उपस्थित होती है तो समस्या चिंतन को जन्म देती है तथा चिंतन के द्वारा व्यक्ति समस्या का समाधान खोजता है
★ समस्या समाधान एक वैज्ञानिक विधि है
■ बेरॉन के अनुसार- समस्या समाधान एक संज्ञानात्मक प्रक्रिया है इसमें विभिन्न अनुक्रियाओं को करने या उनमें से चुनने का प्रयास सम्मिलित रहता है ताकि वांछित लक्ष्य की प्राप्ति हो सके
समस्या समाधान के चरण
1 समस्या की पहचान करना
2 रूपरेखा तैयार करना
3 आंकड़ों का संकलन करना
4 उपकल्पनाओं का निर्माण करना
5 आंकड़ों का विश्लेषण करना
6 निष्कर्ष निकालना
समस्या समाधान की विधियां
1 यादृच्छिक अन्वेषण विधि - इस विधि में व्यक्ति समाधान के लिए प्रयत्न व त्रुटियों का सहारा लेता है
2 स्वतः शोध अन्वेषण विधि - इस विधि में व्यक्ति समस्या समाधान के लिए उन्हीं विकल्पों का चयन करता है जो उसे संगत प्रतीत होते हैं
मेटलिन के अनुसार - समस्या समाधान के तीन महत्वपूर्ण पहलू है
1 मौलिक अवस्था - समस्या की अवस्था
2 लक्ष्य अवस्था - समाधान की अवस्था
3 नियम - समस्या समाधान के बीच में किए गए कार्य जिसके माध्यम से लक्ष्य तक पहुंचा गया हो
प्रत्यक्षण - वुडवर्थ के अनुसार - प्रत्यक्षण ज्ञानेंद्रियों द्वारा वस्तुओं एंव वस्तुनिष्ठ तथ्यों को जानने की प्रक्रिया है
संवेदना - ज्ञानेंद्रियों के प्रभाव से मस्तिष्क तक पहुंचने की प्रक्रिया को संवेदना कहते हैं संवेदना मस्तिष्क की एक सामान्य व सरलतम प्रक्रिया है
★ ज्ञानेंद्रियों के आधार पर पांच प्रकार की संवेदना होती है परंतुुुु आधुनिक मनोवैज्ञानिको नेे सात संवेदनाओं ( आंख, कान, नाक, त्वचा, जिह्वा, दिशा संवेदना, संतुलन संवेदना ) के अस्तित्व को स्वीकार किया है
आत्म संप्रत्यय - व्यक्ति स्वयं के बारे में स्वयं की योग्यताओं, क्षमताओं, भावनाओं आदि के बारे में जो विचार रखता है वह उसके आत्म संप्रत्यय का निर्माण करते हैं
उदाहरण यदि कोई विद्यार्थी गणित में कमजोर है परंतु संगीत में निपुण है तो उसका स्व संप्रत्यय संगीत में गणित की तुलना में अच्छा व सकारात्मक होता है
एक नवजात में स्वयं के बारे में धारणा विकसित नहीं होती है
संप्रत्यय - संप्रत्यय पूर्व अनुभवों पर आधारित होता है, यह प्रत्येक देखी गई वस्तु का व्यक्ति के मन में नमूना या प्रतिमान होता है
संप्रत्यय का निर्माण
1 प्रत्यक्षीकरण
2 गुणों का विश्लेषण
3 तुलना
4 पृथक्करण
5 सामान्य करण
6 समस्या समाधान
स्मृति - स्मृति पर सर्वप्रथम क्रमबद्ध अध्ययन जर्मन मनोवैज्ञानिक ऐविंगहास द्वारा 1885 में किया गया
वुडवर्थ के अनुसार - सीखने के पश्चात उस बात को याद रखना या पुनः प्रस्तुत करना स्मृति कलहाती है
■ स्मृति के तीन प्रमुख तत्व है
1 कूट संकेतन
2 भंडारण
3 पुनरुद्धार
■ एटकिंसन ने 1968 में स्मृति का प्रथम मॉडल "अवस्था मॉडल" प्रस्तुत किया
★ अवस्था मॉडल के अनुसार स्मृति तीन प्रकार की होती है
1 तात्कालिक स्मृति - इसमें व्यक्ति सूचनाओं को एक सेकंड या उससे भी कम समय के लिए याद रख पाता है
2 अल्पकालिक स्मृति- इसमें स्मृति का स्थाईपन 20 - 30 सेकंड तक होता है
★ विलियम जेम्स ने इसे प्राथमिक समृति का है
3 दीर्घकालीन स्मृति - इसे विलियम जेम्स ने गौण स्मृति कहा है, इसमें व्यक्ति कम से कम 30 सेकंड तथा अधिक से अधिक कितने भी दिनों तक याद रख सकता है
मानचित्र निरूपण - मानचित्र निरूपण एक ऐसा चित्र या नक्शा होता है जो विभिन्न अवधारणाओं के बीच संबंध को दर्शाता है यह एक आलेखीय उपकरण होता है जो किसी विषय के अलग-अलग पहलुओं को व्यवस्थित रूप देता है
■ अवधारणा मानचित्र के लाभ
1 पाठ को पढ़ाने से पूर्व योजना निर्माण में सहायक
2 व्याख्यान का सारांश हेतु सहायक
3 जटिल सरंचनाओ की रूपरेखा में सहायक
4 पूर्व अवधारणा के साथ नवीन अवधारणा को जोड़कर समझने में सहायक
कल्पना - पूर्व अनुभवों के आधार पर किसी वस्तु की अनुपस्थिति में भी उस वस्तु के बारे में सोचना कल्पना है
मेकडुगल के अनुसार - कल्पना मानसिक हस्त व्यापार है तथा अप्रत्यक्ष वस्तु के बारे में चिंतन है
■ मेकडुगल के अनुसार कल्पना के प्रकार
1 उत्पादन कल्पना - पूर्व अनुभवों के आधार पर नव निर्माण
2 पुनरुत्पादन कल्पना - एक बार नव निर्माण के बाद भी नवीन विचारों का सृजन होना
■ कल्पना की विशेषता
◆ मानसिक प्रक्रिया
◆ पूर्व अनुभवों पर आधारित
◆ प्रतिभा चयन
◆ सृजन शक्ति
◆ उत्पादन विचार
◆ मौलिक चिंतन का आधार
कल्पना के लाभ
● बालक को चिंतनशील बनाती है
● बालकों को निष्कर्षों तक ले जाती है
● बालक में सृजनशीलता के गुणों का विकास करती है
तर्क = किसी भी समस्या के समाधान हेतु किया गया वह चिंतन जिसके द्वारा निश्चित रूप से समाधान हो ही जाता है ऐसे वास्तविक चिंतन को तर्क कहते हैं
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