1 व्यवहारवाद के अनुसार
1 उद्दीपक अनुक्रिया सिद्धांत- (stimulus response theory)=प्रवर्तक- थोर्नडाइक (अमेरिका )
अन्य नाम-
★ आवर्ती का सिद्धांत
★ S-R THEORY
★ सुख - दुख का सिद्धांत
★ प्रयास व त्रुटि का सिद्धांत
★ बंध सिद्धांत
★ संबंधबाद/ संयोजन वाद का सिद्धांत
■ उद्दीपक अनुक्रिया से आशय- किसी उद्दीपक के माध्यम से अनुक्रिया का प्रारंभ होना ही उद्दीपक अनुक्रिया कहलाता है
◆थोर्नडाइक ने अपने सिद्धांत में उद्दीपक की उपस्थिति पर बल दिया
◆थोर्नडाइक के अनुसार उद्दीपक के अभाव में अनुक्रिया प्रारंभ नहीं हो सकती
◆थोर्नडाइक ने अपने सिद्धांत का प्रतिपादन करने हेतु भूखी बिल्ली पर प्रयोग किया
◆थोर्नडाइक ने निष्कर्ष निकाला कि मछली की गंध से प्रभावित होकर बिल्ली अनुक्रिया करती है और अनुक्रिया करते करते दरवाजा खोलना सीख जाती है इसी प्रकार व्यक्ति भी सही दिशा में निरंतर प्रयास करता है तो वह उस कार्य या व्यवहार को सीख जाता है
◆थोर्नडाइक के सिद्धांत में बिल्ली प्रेरक की पूर्ति हेतु अनुक्रिया करती है तथा इसमें अभिप्रेरणा प्रत्यक्ष होती है
★ यह सिद्धांत निरीक्षण प्रणाली पर आधारित है
■थोर्नडाइक ने अपने सिद्धांत का प्रतिपादन करने हेतु 3 मुख्य नियम बताएं
1 तत्परता का नियम - थोर्नडाइक के अनुसार किसी भी कार्य को करने के लिए व्यक्ति को सर्वप्रथम तत्परता उत्पन्न करनी चाहिए क्योंकि तत्परता के अभाव में कभी भी सफलता प्राप्त नहीं हो सकती
उदाहरण - छोटे बालकों को पढ़ने के लिए बिठाया जा सकता है लेकिन पढ़ाया नहीं जा सकता
थोर्नडाइक के इस नियम को अभिप्रेरणा/मनोवृत्ति/मानसिकता का नियम भी कहते हैं
2 अभ्यास का नियम -थोर्नडाइक के अनुसार बालक को किसी भी कार्य को करने के लिए निरंतर अभ्यास करते रहना चाहिए क्योंकि अभ्यास के अभाव में सफलता नहीं मिल सकती
उदाहरण - कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती
इसके दो उपनियम हैं
(a) उपयोगिता का नियम - व्यक्ति उसी वस्तु के लिए अभ्यास करता है जो उसके लिए महत्वपूर्ण है
उदाहरण - किसान के लिए उपजाऊ भूमि नंबर
(ब) अनुपयोगिता का नियम - व्यक्ति उस वस्तु के लिए कभी भी अभ्यास प्रारंभ नहीं करता जो उसके महत्व या उपयोग की ना हो
उदाहरण- किसान के लिए बंजर भूमि
3 प्रभाव का नियम -थोर्नडाइक के अनुसार व्यक्ति के द्वारा उसी विषय वस्तु के लिए प्रयास किया जाता है जो उसे प्रभावित करती है
उदाहरण - सफलता द्वारा सफलता प्राप्त करना
10 वीं में मेरिट में आने के बाद 12 वीं में मेरिट में आने का प्रयास करना
थोर्नडाइक ने अपने सिद्धांत में 5 गौण नियम भी बताएं
1 बहु प्रतिक्रिया का नियम - इस नियम के अनुसार व्यक्ति को किसी भी कार्य को करने के लिए निरंतर एक से अधिक बार प्रयास करते रहने की आवश्यकता होती है
जैसे -किसी प्रतियोगी छात्र द्वारा लाखों प्रशन याद करना
2 आंशिक क्रिया का नियम - इस नियम के अनुसार बालक को किसी विषय वस्तु का शिक्षण कराने से पूर्व विषय वस्तु को छोटे-छोटे भागों में विभक्त कर सिखाया जाता है
उदाहरण - बूंद बूंद से घड़ा भरता है
यह नियम अंश से पूर्ण की ओर प्रकट करता है
3 मानसिक विन्यास का नियम- इस नियम के अनुसार किसी भी कार्य को करने से पूर्व व्यक्ति की मानसिकता का होना आवश्यक है
उदाहरण - मन के हारे हार है मन के जीते जीत
यह तत्परता के नियम का भाग माना जाता है
4 आत्मीकरण का नियम- पूर्व अनुभव को ध्यान में लाकर नवीन कार्य करने की मानसिक प्रक्रिया आत्मीकरण कहलाती है
जैसे -घर पर अपने छोटे भाई बहनों को पढ़ाना
5 साहचर्य परिवर्तन का नियम- सीखने सिखाने की प्रक्रिया में आंशिक परिवर्तन कर सिखाने की प्रक्रिया साहचर्य परिवर्तन कहलाती है
उदाहरण- एकलव्य द्वारा धनुष विद्या सीखना
शैक्षिक महत्व
★ छोटे बालकों को सिखाने में सहायक
★ पुनरावृति की क्रिया पर बल
★ अच्छी आदतों के निर्माण में सहायक
★ मंद गति से सीखने वालों के लिए विशेष उपयोगी
★ गामक कौसलो सुनना, तैरना, साइकिल चलाना, गाड़ी चलाना, टाइपिंग सीखना, टाई की गांठ बांधना आदि कौशल प्रयास में त्रुटि पर आधारित है
★ अभ्यास की क्रिया पर आधारित
2 अनुकूलित अनुक्रिया का सिद्धांत = प्रवर्तक पॉवलाव (रूस)
अन्य नाम -
◆ अनुकूलन सिद्धांत
◆ शास्त्रीय सिद्धांत
◆ अधिगम का प्राचीन सिद्धांत
◆ संबंध प्रत्यावर्तन सिद्धांत
◆ क्लासिकल थ्योरी
◆ C-R THEORY
◆ अनुबंधन सिद्धांत
■ पॉवलाव एक शरीर शास्त्री था
■ पॉवलाव को अनुबंधन का जनक माना जाता है
■ पॉवलाव को अनुबंधन के कारण ही 1904 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया
★पावलाव ने कुत्ते की लार ग्रंथि पर प्रयोग किया
अनुकूलित अनुक्रिया = पॉवलाव के अनुसार जो क्रिया पूर्व में भोजन के साथ हो रही थी वही क्रिया अब घंटी के माध्यम से भी होने लगे तो उसे अनुकूलित अनुक्रिया कहते है
अस्वाभाविक उद्दीपक ------------ स्वाभाविक क्रिया
Example
1 भोजन --------- कुत्ता --------- लार
UCS----------------------------UCR
2 घण्टी +भोजन ----कुत्ता ------- लार
CS + UCS--------------------UCR
3 घण्टी------------- कुत्ता-----------लार
CS--------------------------------CR
पॉवलाव ने अपने सिद्धांत का प्रतिपादन करते समय दो प्रकार की क्रिया बताई
1 स्वाभाविक
2 अस्वाभाविक
★ पावलाव के सिद्धांत में घंटी के माध्यम से लार का आना एक अस्वाभाविक क्रिया है अतः घंटी एक अनुकूलित या अनुबंधित या अस्वाभाविक उद्दीपक है
■ पावलाव के अनुसार अनुकूलित अनुक्रिया के लिए अनुबंधन का होना अति आवश्यक है
■ पुनरावृति के आधार पर निर्मित किया अनुबंधन कहलाती है
विलोपीकरण - अनुक्रिया में लंबे समय तक स्वभाविक उदीपक प्रस्तुत न करने पर अनुबंधन समाप्त हो जाता है अतः अनुबंधन समाप्त होने की प्रक्रिया विलोपीकरण कहलाती है
आदत का बनना अनुबंधन है जबकि आदत का छूटना विलोपीकरण है
उद्दीपक सामान्यकरण - पॉवलाव के अनुसार मिलती-जुलती परिस्थितियों में अनुक्रिया का प्रारंभ होना उद्दीपक सामान्यकरण कहलाता है
उदाहरण सांप देखने के बाद रस्सी से भी डर जाना
उद्दीपक विभेदीकरण - दो उद्दीपको में समानता - असमानता का पता लगाना उद्दीपक विभेदीकरण कहलाता है
समय कारक - पॉवलाव के अनुसार दो उद्दीपको के मध्य अनुबंधन कराने हेतु अधिकतम 5 सेकंड का ही अंतराल होना चाहिए इससे अधिक अंतराल होने पर अनुबंधन नहीं होगा
बुद्धि कारक - पॉवलाव के अनुसार मंदबुद्धि बालक को अधिगम नहीं करवाया जा सकता, क्योंकि मंदबुद्धि बालकों में अनुबंधन करने की क्षमता नहीं होती
पुनःप्रकटीकरण - जब कोई व्यवहार विलोपित हो जाता है तो उस प्राणी को US+UCR उद्दीपक दे दिया जाता है तो उसका विलोपित व्यवहार पुनः प्रकट हो जाता है
शैक्षिक महत्व
■पुनरावृति की क्रिया पर बल
■अच्छी आदतों के निर्माण में सहायक
■ जानवरों के प्रशिक्षण में सहायक
■ छोटे बालकों को सिखाने में सहायक
■अक्षर व भाषाई ज्ञान सिखाने में सहायक
3 क्रिया प्रसूत अनुबंधन = प्रतिपादक स्किनर
अन्य नाम
◆ नैमित्तिक अनुबंधन का सिद्धांत
◆ सक्रिय अनुबंधन का सिद्धांत
◆ R-S THEORY
■ स्किनर का यह सिद्धांत थोर्नडाइक व क्लार्क हल के सिद्धांत पर आधारित है
★स्किनर ने हल के सिद्धांत से पुनर्बलन तत्व को स्वीकार किया
■ क्रिया प्रसूत से आशय = वह व्यवहार जिसका संचालन बिना किसी प्रत्यक्ष उद्दीपक के व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर करता हो क्रिया प्रसूत कहलाता है
◆ स्किनर ने अपने सिद्धांत के माध्यम से कहा कि प्राणी को बिना उद्दीपक दिखाएं किसी अनुक्रिया से जोड़ा तल सकता है लेकिन इसके लिए आवश्यक है कि प्राणी को क्रिया के तुरंत बाद प्रोत्साहन मिले तो वह प्राणी उसकी क्रिया को सफलतापूर्वक कर लेता है
■ स्किनर ने अपने सिद्धांत में निरंतर अनुक्रिया करते रहने पर विशेष दिया, बालकों को निरंतर अनुक्रिया करते रहना चाहिए तथा अनुक्रिया के मध्य या समाप्ति के बाद उन्हें तत्काल पुनर्बलन प्रदान करना चाहिए ऐसा करने से उनकी त्रुटियों की मात्रा में कमी होने लगती है तथा उनका अधिगम प्रभावी हो जाता है
★ स्किनर ने अपने सिद्धांत का प्रतिपादन करने हेतु चूहे व सफेद कबूतर पर प्रयोग किया
◆ स्किनर ने अपने सिद्धांत में चार प्रकार के पुनर्बलन बताएं
1 क्रमिक पुनर्बलन
2 निश्चित अनुपात पुनर्बलन
3 निश्चित अंतराल पुनर्बलन
4 परिवर्तन शील पुनर्बलन
★स्किनर के अनुसार बालक को नकारात्मक रूप से पुनर्बलन नहीं प्रदान करना चाहिए क्योंकि नकारात्मक पुनर्बलन द्वारा बालक में हीन भावना का विकास हो जाता है
● स्किनर ने अपने सिद्धांत के प्रतिपादन करने हेतु दो प्रकार के व्यवहार बताएं
1 प्रतीकात्मक व्यवहार= जिस का संचालन सीधा उदीपक के माध्यम से होता है
उदाहरण - आंख में तिनका गिरने पर आंख से आंसू आना
2 क्रिया प्रसूत व्यवहार= वह व्यवहार जिस का संचालन व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर करता है
उदाहरण- टेलीफोन की घंटी बजने पर बात करना या ना करना
पुनर्बलन - ऐसी क्रिया जो अनुक्रिया की संख्या में वृद्धि करें पुनर्बलन कहलाती है
■ पुनर्बलन की अवधारणा स्किनर द्वारा दी गई तथा पुनर्बलन सिद्धांत क्लार्क हल ने दिया
★ स्किनर ने दो प्रकार के पुनर्बलन बताएं
1 सकारात्मक
2 नकारात्मक
पुनर्बलन अनुसूची- इसकी अवधारणा स्किनर द्वारा दी गई
★ पुनर्बलन अनुसूची दो प्रकार की है
1 सतत - प्रत्येक अनुक्रिया पर पुनर्बलन देना
2आंशिक- कुछ अनुक्रिया पर पुनर्बलन देना
■आंशिक पुनर्बलन दो प्रकार का होता है
1 अनुपात
2 अंतराल
शैक्षिक महत्व
1 सामान्य बालकों को सिखाने में सहायक
2 क्रिया की निरंतरता पर बल
3 अभिक्रमित अनुदेशन विधि इसी सिद्धांत पर आधारित है
4 निदानात्मक में उपचारात्मक शिक्षण में सहायक
5 मनोरोगियों के उपचार में सहायक
4पुनर्बलन का सिद्धांत - प्रतिपादक - क्लार्क हल
अन्य नाम
■ प्रबलन का सिद्धांत
■ व्यवस्थित व्यवहार का सिद्धांत
■चालक न्यूनता सिद्धांत
■सबलीकरण सिद्धांत
● हल का सिद्धांत थार्नडाइक व पॉवलाव के सिद्धांत पर आधारित है
●हल ने अपने सिद्धांत में आवश्यकता पूर्ति पर सर्वाधिक बल दिया
■ हल ने अपने प्रयोग निम्न प्रकार से किए
1 भूखी बिल्ली को puzzal बॉक्स में बिठाया वह बाहर मछली का टुकड़ा रखा तो बिल्ली ने प्रयास करते हुए दरवाजा खोला
2 बिल्ली को भरपेट भोजन करवाकर puzzal बॉक्स में बिठाया और बाहर मछली का टुकड़ा रखा परंतु इस बार बिल्ली ने दरवाजा खोलने का प्रयास नहीं किया
इन प्रयोगों के आधार पर हल ने सिद्ध किया कि बिल्ली को भूख की आवश्यकता थी तो उसने प्रयास किया परंतु जब बिल्ली को आवश्यकता नहीं थी तो उसने बाहर आने का प्रयास ही नहीं किया तथा अर्थ प्राणी उसी कार्य को बार-बार करता है जिस कार्य को करने से उसकी आवश्यकता की पूर्ति होती है और आवश्यकता पूर्ति उस प्राणी के लिए पुनर्बलन होता है
●व्यक्ति की आवश्यकता कभी समाप्त नहीं होती है अतः व्यक्ति की सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती
●हल के अनुसार व्यक्ति अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए व्यवस्थित एंव क्रमबद्ध रूप से व्यवहार करता है
● स्किनर ने लिखा कि आज तक का अधिगम का हल का सिद्धांत सर्वश्रेष्ठ सिद्धांत है
■ लेस्टर एंडरसन के अनुसार- हल का सिद्धांत नपे तुले शब्दों का सिद्धांत है
शैक्षिक महत्व
1 आवश्यकता आपूर्ति पर बल
2 बालक को आवश्यकता अनुसार शिक्षण देना चाहिए
3 सकारात्मक पुनर्बलन पर बल
4 क्रमबद्ध व्यवहार द्वारा आवश्यकता पूर्ति संभव
5 प्रतिस्थापन सिद्धांत - प्रतिपादक - एडविन गुथरी
★ प्रतिस्थापन से आशय - किसी पूर्व अनुभव का नवीन परिस्थितियों में अनुप्रयोग कर समस्या समाधान करने की मानसिक प्रक्रिया प्रतिस्थापन कहलाती है
■ गुथरी के अनुसार जब उद्दीपक व अनुक्रिया दोनों एक साथ प्रस्तुत हो जाए तो दोनों के मध्य एक संबंध का निर्माण हो जाता है, गुथरी ने 3 वर्षीय बालक व खरगोश पर प्रयोग कर निष्कर्ष निकाला कि उदीपक व अनुक्रिया के बीच समीपता स्थापित करनी चाहिए ताकि अधिगम की प्रक्रिया को प्रभावी बनाया जा सके
■ एडविन गुथरी ने अपने सिद्धांत का प्रतिपादन करने हेतु खरगोश और चूहे पर प्रयोग किया
■ गुथरी एक परंपरावादी मनोवैज्ञानिक हैं
■ गुथरी के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक जीवन की समस्याओं का समाधान इसी सिद्धांत के आधार पर करता है
■ गुथरी स्किनर के सिद्धांत से असहमत थे
■ गुथरी ने अनुभव द्वारा सीखने पर सर्वाधिक बल दिया
■ गुथरी सीखने में पुनर्बलन व अभ्यास दोनों को ही महत्वपूर्ण नहीं मानते
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