स्किनर का सिद्धांत
क्रिया प्रसूत अनुबंधन = प्रतिपादक स्किनर
अन्य नाम
◆ नैमित्तिक अनुबंधन का सिद्धांत
◆ सक्रिय अनुबंधन का सिद्धांत
◆ R-S THEORY
■ स्किनर का यह सिद्धांत थोर्नडाइक व क्लार्क हल के सिद्धांत पर आधारित है
★स्किनर ने हल के सिद्धांत से पुनर्बलन तत्व को स्वीकार किया
■ क्रिया प्रसूत से आशय = वह व्यवहार जिसका संचालन बिना किसी प्रत्यक्ष उद्दीपक के व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर करता हो क्रिया प्रसूत कहलाता है
■ स्किनर ने अपने सिद्धांत में निरंतर अनुक्रिया करते रहने पर विशेष दिया, बालकों को निरंतर अनुक्रिया करते रहना चाहिए तथा अनुक्रिया के मध्य या समाप्ति के बाद उन्हें तत्काल पुनर्बलन प्रदान करना चाहिए ऐसा करने से उनकी त्रुटियों की मात्रा में कमी होने लगती है तथा उनका अधिगम प्रभावी हो जाता है
★ स्किनर ने अपने सिद्धांत का प्रतिपादन करने हेतु चूहे व सफेद कबूतर पर प्रयोग किया
◆ स्किनर ने अपने सिद्धांत में चार प्रकार के पुनर्बलन बताएं
1 क्रमिक पुनर्बलन
2 निश्चित अनुपात पुनर्बलन
3 निश्चित अंतराल पुनर्बलन
4 परिवर्तन शील पुनर्बलन
★स्किनर के अनुसार बालक को नकारात्मक रूप से पुनर्बलन नहीं प्रदान करना चाहिए क्योंकि नकारात्मक पुनर्बलन द्वारा बालक में हीन भावना का विकास हो जाता है
● स्किनर ने अपने सिद्धांत के प्रतिपादन करने हेतु दो प्रकार के व्यवहार बताएं
1 प्रतीकात्मक व्यवहार= जिस का संचालन सीधा उदीपक के माध्यम से होता है
उदाहरण - आंख में तिनका गिरने पर आंख से आंसू आना
2 क्रिया प्रसूत व्यवहार= वह व्यवहार जिस का संचालन व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर करता है
उदाहरण- टेलीफोन की घंटी बजने पर बात करना या ना करना
शैक्षिक महत्व
1 सामान्य बालकों को सिखाने में सहायक
2 क्रिया की निरंतरता पर बल
3 अभिक्रमित अनुदेशन विधि इसी सिद्धांत पर आधारित है
4 निदानात्मक में उपचारात्मक शिक्षण में सहायक
5 मनोरोगियों के उपचार में सहायक
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