बाल विकास के आयाम -संवेगात्मक विकास
संवेगात्मक विकास :
■ बालकों की शारीरिक संरचना में तत्काल परिवर्तन कर उन्हें कार्य करने के लिए प्रेरित करने वाली प्रक्रिया संवेग कहलाती है
★संवेग व्यक्ति के जन्म से प्रारंभ होते हैं जो व्यक्ति को गतिशील बनाते हैं
★संवेग तत्काल उत्पन्न होते हैं परंतु शांत धीरे-धीरे होते हैं
◆ संवेग के माध्यम से रचनात्मक के विनाशात्मक परिणाम प्रकट होते हैं
■ संवेग अंग्रेजी के EMOTION का हिंदी रूपांतरण है जिसका शाब्दिक अर्थ - गति प्रदान करने से होता है
परिभाषा :
★ वुडवर्थ के अनुसार - व्यक्ति के आवेग या गति में आने की दशा ही संवेग है
◆ वैलेंटाइन के अनुसार- जब व्यक्ति में रागात्मक तत्वों का वेग बढ़ता है तो संवेग की उत्पत्ति होती है
■ क्रो एंड क्रो के अनुसार -संवेग को व्यक्ति की उत्तेजित दशा के रूप में व्यक्त किया जा सकता है
★ जरशिल्ड के अनुसार - अचानक भड़क उठने या किसी विकार के उत्पन्न होने की प्रक्रिया संवेग कहलाती है
■ बृजेश नामक मनोवैज्ञानिक ने नवजात शिशु में उत्तेजना संवेग बताया
■ वाटसन ने व्यक्ति में तीन प्रकार के संवेग बताएं -
1 भय 2 क्रोध 3 प्रेम
★ संवेगों की विशेषता
● संवेग एक चेतन अनुभूति है
● संवेगों में व्यक्तिगत भिन्नता पाई जाती है
● संवेग व्यक्ति की क्रियाशीलता पर प्रभाव डालते हैं
● संवेग उत्पत्ति के दौरान व्यक्ति की मानसिकता कार्य करना कम कर देती है
● तत्काल उत्पन्न होते हैं परंतु शांत धीरे-धीरे होते हैं
● संवेग सुखद वह दुखद होते हैं
● संवेग के रचनात्मक एंव विनाशात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं
● संवेग के आंतरिक व बाह्य परिवर्तन होते हैं
Comments
Post a Comment