बाल विकास के आयाम- मानसिक विकास
बाल विकास
बालक के जन्म से लेकर किशोरावस्था के अंत तक उनमें होने वाले जैविक और मनोवैज्ञानिक परिवर्तनों को बाल विकास कहते हैं
बाल विकास के आयाम
1 मानसिक विकास-
मानसिक विकास वह योग्यता है जिसमे व्यक्ति अपनी समस्याओं का समाधान कर वातावरण का शिकार होने से बचता है
■ शैशवावस्था में बालको का सर्वाधिक एंव तीव्र गति से मानसिक विकास होता है
■ पांच वर्ष तक के बालको का 90•/. तक मानसिक विकास पूर्ण हो जाता है
★ गुडएनफ के अनुसार-
बालको का जितना भी मानसिक विकास होता है उसका आधा प्रारंभिक तीन वर्षों में हो जाता है
★ थार्नडाइक के अनुसार-
तीन से छः वर्ष जे बालक प्रायः अर्धस्वपन की अवस्था मे रहते है
मानसिक विकास की प्रक्रिया :
● 1 माह का बालक आवश्यकता पूर्ति के लिए जोर से आवाज करता है
● 2 माह का बालक चमकीली वस्तुओं की ओर आकर्षित होता है
● 3 माह का बालक अपनी माँ को पहचानने लगता है
● 4 माह का बालक अपने नाम को समझने लगता है
● 6 माह का बालक परिचितों को देखकर मुस्कुराता है
● 8 माह का बालक जमीन से अपनी पसंद की वस्तुएं उठाने लगता है
● 10 माह जा बालक अपने पास के वातावरण में होने वाले परिवर्तनों को समझने लगता है
●12 माह का बालक अनुकरण करने लग जाता है
● 18 माह का बालक अपनी पसंद की वस्तुओं को संकेतों से मांगने लगता है
● 24 माह का बालक नाम बताना, शरीर के अंगों के नाम बताने लग जाता है
●36 माह का बालक का बालक 4-5 अक्षरो के शब्द बोलने लगता है
● 5 वर्ष के बालक को सिक्को का ज्ञान हो जाता है
● 6 वर्ष के बालक व्याकरण की दृष्टि से शुद्ध उच्चारण करने लग जाते है
● 8 वर्ष के बालक अपने जीवन की सामान्य समस्याओ का समाधान करने लग जाता है
● 9 वर्ष के बालक गणित की सरल प्रक्रिया हल कर लेते है
● 12 वर्ष के बालक का भाषाई विकास पूर्ण हो जाता है
●16 वर्ष के बालक का मानसिक विकास पूर्ण हो जाता है
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