बाल विकास
बाल विकास के आधार-
1 वंशक्रम
2 वातावरण
■ वुडवर्थ के अनुसार - बाल विकास वंशक्रम व वातावरण का गुणनफल है योगफल नहीं
वंशक्रम.
• वंशक्रम = पूर्वजो से प्राप्त वह लक्षण जिस से संतानोत्पत्ति का निर्धारण होता है या अपने समान संतान उतपन्न करने की प्रकिया ही वंशक्रम कहलाती है
★ पूर्वजो से प्राप्त गुणों व विशेषताओ का पीढ़ी दर पीढ़ी संतानों में स्थानातरण होने की प्रक्रिया वंशक्रम कहलाती है
★ वैज्ञानिक दृष्टिकोण से - जीन्स के माध्यम से माता- पिता के गुणों का संतानों में हस्तातंरण होना ही आनुवांशिकता या वंशक्रम है
■ शरीर का आरंभ केवल एक कोष से होता है जिसे संयुक्त कोष कहा जाता है जो मातृ + पितृ कोष से मिलकर बनता है
परिभाषा
◆ पीटरसन के अनुसार- माता पिता के माध्यम दादा- दादी नाना- नानी एंव पूर्वजों के लक्षणो का संतानों में हस्तातंरण ही वंशक्रम है
◆ जेम्स ड्रेवर के अनुसार- माता पिता के शारीरिक एंव मानसिक विशेषताओ का संतानों में हस्तातंरण होना ही वंशक्रम है
◆ B N झा के अनुसार- बालक बालिकाओ की जन्मजात शक्तियों का पूर्ण योग ही वंशक्रम है
★ वंशक्रम के सिद्धान्त
■ बीजकोष की निरन्तता का सिद्धांत-
प्रतिपादक- बीजमैंन
मानव शरीर में दो प्रकार के कोष होते हैं
1. दैहिक कोष 2.उत्पादक कोष
दैहिक कोष शारीरिक संरचना का कार्य तथा उत्पादक कोष
गुणों का हस्तातंरण का कार्य करते है
बीजमेन के अनुसार जिस जीव- द्रव्य से सजीवों की उत्पति होती है वह द्रव्य कभी समाप्त नही होता, वह पीढ़ी दर पीढ़ी संतानों हस्तातंरित होता रहता है
■ अर्जित गुणों के स्थानातरण का सिद्धांत :-
प्रतिपादक - लेमार्क
इस नियम के अनुसार माता-पिता द्वारा अपने जीवन काल में अर्जित किए जाने वाले गुण उनकी संतान को प्राप्त होते हैं क्योंकि इन गुणों का प्रभाव जनन द्रव्य पर होता है|
लेमार्क ने जिराफ की गर्दन का उदाहरण दिया
■ प्रत्यागमन/ परावर्तन का नियम:-
इस नियम के अनुसार,” बालक में अपने माता पिता के ठीक विपरीत गुण पाए जाते हैं | बहुत प्रतिभाशाली माता-पिता के बच्चों में मंदबुद्धि होने और मंदबुद्धि माता-पिता के बच्चो का प्रतिभाशाली होना ही प्रत्यागमन का नियम है
Example - बाबर का पुत्र हुमायूं
■ अर्जित गुणों के अस्थानातरण का सिद्धांत
प्रतिपादक- बीजमैंन
बिजमेंन के अनुसार वातावरण से अर्जित गुणो को वंशक्रम के माध्यम से संतानो में स्थानातरण नहीं किया जा सकता है
Note- बिजमेंन ने चूहे की पूंछ को काटकर यह प्रयोग किया
■ समानता का नियम
इस नियम के अनुसार माता – पिता जैसे होते है उनकी संतान भी वैसी ही होगी यदि माता -पिता बुद्धिमान है तो उनकी संतान भी बुद्धिमान होगी और यदि माता – पिता कद में छोटे होगे तो उन की संतान भी छोटे कद की होगी
NOTE -इस नियम को परखने के बाद यह पाता लगा कि इस नियम का सामान्यीकरण (Generalization) नहीं कर सकते, क्योकि कभी कभी यह भी देखा गया है। सुन्दर माता पिता के बच्चे सुन्दर नही होते, तथा कुरूप माता – पिता के बच्चे सुन्दर पैदा होते हैै
वंशक्रम के प्रभावो का अध्ययन
1- ज्यूक वंश पर अध्ययन-
डगलस के अनुसार- चरित्रहीन माता पिता की संतानें चरित्रहीन होती है
2- एडवर्ड वंश पर अध्ययन-
विनशिप के अनुसार प्रतिष्ठित माता पिता की संतानें प्रतिष्ठा प्राप्त करती है
3 कालिकाक वंश पर अध्यन-
प्रतिपादक- गोडार्ड
कालिकाक एक भ्र्ष्ट सिपाही था और पत्नी मंद बुद्धि थी, उनकी अधिकांश संताने मंदबुद्धि, अवैध, थी
कालिकाक की दूसरी पत्नी एक विदुषी महिला थी उनकी अधिकांश संताने प्रतिष्टित व उच्च पदों पर कार्यरत थी
4 थोर्नडाइक के अनुसार - बालक की मूल शक्तियां उसके वंशकर्म पर निर्धारित है थोर्नडाइक ने जुड़वा बच्चों की समानता जानने के लिए उनका अध्ययन 6 प्रकार की मानसिक परीक्षाओं के आधार पर किया
5 शारीरिक लक्षणों का प्रभाव- पीएरसन के अनुसार यदि माता-पिता की लंबाई अधिक है तो बालकों की लंबाई भी अधिक होगी और माता-पिता की लंबाई कम होती है तो बालकों की लंबाई भी कम होगी
6 बुद्धि पर प्रभाव - गोड़ार्ड का मत है तीव्र बुद्धि माता पिता की संतान तीव्र बुद्धि तथा मंदबुद्धि माता-पिता की संतान मंदबुद्धि होगी
वातावरण -
इसके लिए पर्यावरण शब्द का भी प्रयोग किया जाता है।पर्यावरण दो शब्दों से बना है― परि + आवरण, परि का अर्थ है ― चारों ओर तथा आवरण का अर्थ― ढका हुआ।
● इस प्रकार पर्यावरण या वातावरण वह वस्तु है जो हमें चारों से ढके हुए है
◆वायुमंडल में उपस्थित भौतिक एवं अभौतिक तत्वो का वह संगठन जो मानव जीवन पर प्रत्यक्ष/ अप्रत्यक्ष रूप से प्रभाव डालता हो वातावरण कहलाता है
★जहाँ वंशक्रम प्रभाव डालता है वहाँ वातावरण भी प्रभाव डालता है
परिभाषा
रॉस के अनुसार - वातावरण वह बाहरी शक्ति है जो हमें प्रभावित करती है
जिस्बर्ट के अनुसार - वातावरण वह हर वस्तु है जो किसी अन्य वस्तु को घेरे हुए है और सीधे उस पर अपना प्रभाव डालती है।”
वातावरण के कारक
(2) आर्थिक कारक- धन से केवल सुविधाएं नहीं प्राप्त होती हैं,बल्कि इससे पौष्टिक चीजें भी खरीदी जा सकती हैं। जिससे मनुष्य का शरीर विकसित होता है,आर्थिक वातावरण मनुष्य की बौद्धिक क्षमता को भी प्रभावित करता है सामाजिक विकास पर भी इसका प्रभाव पड़ता है।
(3) सामाजिक कारक - व्यक्ति एक सामाजिक प्राणी है इसलिए उस पर समाज का प्रभाव अधिक दिखाई देता है,सामाजिक व्यवस्था, रहन-सहन ,परंपराएं, धार्मिक रीति- रिवाज, पारस्परिक अन्तः क्रिया,और संबंध आदि बहुत से तत्व है,जो मनुष्य के शारीरिक मानसिक तथा भावात्मक एवं बौद्धिक विकास को किसी न किसी ढंग से अवश्य प्रभावित करते हैं।
(4) सांस्कृतिक कारक - धर्म और संस्कृति मनुष्य के विकास को अत्यधिक प्रभावित करती है,खाने का ढंग,रहन-सहन का ढंग, पूजा पाठ का ढंग, समारोह मनाने का ढंग, संस्कार का ढंग आदि हमारी संस्कृति है।
बालक पर वातावरण का प्रभाव-
1 शारीरिक अंतर पर प्रभाव
फ्रेंज बोन्स के अनुसार-“विभिन्न प्रजातियों के अंतर का कारण वंशानुक्रम ना होकर वातावरण है।”
2 मानसिक विकास का प्रभाव –
गार्डन के अनुसार-“उचित सामाजिक व सांस्कृतिक वातावरण ना मिलने पर मानसिक विकास की गति मंद पड़ जाती है।”
3 प्रजाति की श्रेष्ठता का प्रभाव-
क्लार्क के अनुसार-“कुछ प्रजातियों की बौद्धिक श्रेष्ठता का कारण वंशानुक्रम ना होकर वातावरण है।”
4 बुद्धि पर प्रभाव-
कैंडोल के अनुसार-“बुद्धि के विकास में वंशानुक्रम की अपेक्षा वातावरण का प्रभाव कहीं अधिक पड़ता है।”
5 व्यक्तित्व पर प्रभाव-
कूले के अनुसार-“व्यक्तित्व के निर्माण में वंशानुक्रम की अपेक्षा वातावरण का अधिक प्रभाव पड़ता है।”
■ वुडवर्थ के अनुसार - व्यक्ति वंशानुक्रम अथवा वातावरण का योग नहीं गुणनफल है
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